अबकी आवे अइसन नयका साल

अबकी आवे अइसन नयका साल
हो जाये हर गाँव-शहर खुशहाल

आवे रे आवे अइसन मधुमास

फूल खिलावे ठूंठ पेड़ के डाल

झूम-झूम के नाचे मगन किसान
एतना लदरे जौ-गेहूँ के बाल ।

दिन सोना के चाँदी के हो रात
हर अँगना मे अइसन होय कमाल

मस्ती मे सब गावे मिल के फाग
उड़े प्रेम के सगरो रंग-गुलाल

लौटे रे लौटे गाँवन मे गाँव
फेर जमे ऊ संझा के चौपाल

 

Subhikhya
Not from Bihar, heard a lot about the state. Always interested in exploring the art culture and politics of the state. So here I am, writing and doing PR for AaoBihar.com
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