अब जिये में अपना से बड़ा दुखला

10896995_893390984038407_4382702066825771194_n

रोपया भइल बा महंगवा हो की
खोजला से अब हमरा काम ना भेटाला
अब जिये में अपना से बड़ा दुखाला

माई जनामली ता, नून रोटी खियायिली
बाबु खटत खटत, हमनिके जीवायिले हो
पड़े ला जब अपना पर ता बुझला
की अब जिये में अपना से बड़ा दुखला

कहियेसे ताकतनी, की जागी हमर भाग हो
गैले अंग्रेज़, चिचयात मार्ले बापू
बकीर कहे की सुधरे जाओ हाल हो

नेहरु से कहनी, कहनी ई हाल जय प्रकाश से
कहले की हरिहन ई दुखिया हमर हो,
बाकीर नाइखे कुछवो होत हो बाबुवो
की अब जिये में अपना से बड़ा दुखला

पहिले के नेतवा तो सुनतो रलन सान हो
की अब ता सुनवाते बरन सान,
कही ता ई हाल कही केकरा से की
भूकेला ई खाली TViya रेडियोवा हो

जिला के झोका में जियाते बानी अब
ना तो हो तुहो ता बुझते बारा
की अब जिये में अपना से बड़ा दुखला

ना बल रहल, ना दम रहल
ना पैसे रहल, ना भास हो,
अर्ज़ सुना, अब बोलाओ हो बरहम्बाबा
की अब जिये में अपना से बड़ा दुखला

Ritesh Singh
बिहार में जन्म हुआ और फिर भगवान ने बिहारी बनाया। तब से आज तक कुछ कुछ प्रयत्न कर रहे है कामयाब होने की।
गलती से IIT से B.Tech पास करने के बाद, AaoBihar पर लेख लिखना और पढ़ना शौक बन गया है।

Comments

comments