असमानता

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आरजू को जज्बे से तोला जब, थोड़े निराश हुए हम

तमाम उम्र के तजुर्बे ने कहा रोको इस आरजू को,

जब भी फलाते है ये पर तो दुःख ही होता है,

समाज ने कब उठने दिया है हमें जो आज

किस उम्मीद पे बैठे हो, एक आरक्षण पर

जाने कितने लंचना सही है हमने और

कितनी बार जज्बे को कटघरे में उतरा है,

हा सही कहते है आप की, है जज्बा तो

तो उट्ठो आज और जीत लो आरजू को,

मगर कभी सुकून मिले तो इन गलिओ  में

आईएगा जरुर, तब आपको मिलाया करंगे

उन हालातो से जिसे आप इतिहास बताते है,

बदले इस देश की सकल तो आपने देखी है,

आपको बदन भी देखा देंगे उस दिन, फिर सलामी

एक बार और ले ही लीजिएगा आप लोग

क्युकी इस लोकतंत्र में जो असमानता का नीव है

थमता न दिखा है, और न ही उम्मीद की लो दिखती है

Ritesh Singh
बिहार में जन्म हुआ और फिर भगवान ने बिहारी बनाया। तब से आज तक कुछ कुछ प्रयत्न कर रहे है कामयाब होने की।
गलती से IIT से B.Tech पास करने के बाद, AaoBihar पर लेख लिखना और पढ़ना शौक बन गया है।

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