ख्वाहिसों की कतार

Beautiful sunset

ख्वाहिसों की कतार, एक जिंदगी और थोड़ी मजबुरीयाँ

जिस पल ख्वाहिसों के आँचल में बैठे जाते है, मजबुरीयाँ बिल्खालाते हँसती है

जिस पल मजबुरियो के काबू में होते है, ख्वाहिसे कुम्हला कर रोती है

‘थोड़ी मजबुरीयाँ’ हावी है ‘ख्वाहिसों के कतार’ पर |

Ritesh Singh
बिहार में जन्म हुआ और फिर भगवान ने बिहारी बनाया। तब से आज तक कुछ कुछ प्रयत्न कर रहे है कामयाब होने की।
गलती से IIT से B.Tech पास करने के बाद, AaoBihar पर लेख लिखना और पढ़ना शौक बन गया है।

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