गैंग के शूटर: हम हैं मौत के सौदागर, एके-47 के ट्रिगर पर हैं अंगुलियां

Bihar Real Gang of Wasseypur Shooter
राजेंद्र प्रसाद सिंह(51) सोच रहे हैं कि क्यों न इस मोबाइल फोन से पीछा छुड़ा लें. भोर से ही कभी कंपनी का फोन तो कभी किसी और का. सोना, उठना, बैठना हराम. नींद खराब हो गयी है, बदन में दर्द है और सिर भारी सा लग रहा है. अलसाये मन से बिस्तर छोड़ देते हैं. टेबल पर रखे फोन के पास जाते हैं और कुछ बुदबुदाते हुए फोन रिसीव करते हैं. किसी खास का फोन है, बात होने लगी, कुछ काम की बातें और हाल-चाल. दो मिनट की वार्ता थी, अब फोन कट गया. मोबाइल को बेड पर फेंक कर वह कमरे से बाहर निकलते हैं. बाहर गुनगुनी ठंड है, आसमान साफ है, हल्की हवा चल रही है. राजेंद्र का मन अतीत में जाता है, तो घर की याद आती है. यूपी के आजमगढ़ जिले के फुलपुर के रहनेवाले राजेंद्र पिछले एक साल से शिवहर (बिहार) में रह रहे हैं. टेक्नो पावर इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड के सीनियर साइड सुपरवाइजर हैं और राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत चल रहे विद्युतीकरण के कार्य को देख रहे हैं.
फिर फोन घनघना उठा
शिवहर नगर इलाके में मौजूद विंध्यवासिनी नगर के वार्ड नंबर 15 में कंपनी का कार्यालय है और इसी में एक छोटा-सा कमरा लेकर राजेंद्र भी रहते हैं. अब यह शहर उनके लिए अनजान नहीं है, जितनी याद उनके अपने घर की आती है, उतनी ही याद जब वह घर होते हैं, तो शिवहर की आती है. यही सब सोचते हुए बाहर थोड़ा टहल कर वह अच्छा महसूस करते हैं. इस बीच फिर फोन घनघना उठता है. जब तक फोन के पास पहुंचे, तब तक कॉल कट गया. दिमाग में फिर वही टेंशन. वह मोबाइल पर आये नंबर को देखते हैं और नहाने चले जाते हैं.
10 गोलियां दागीं, पल भर में ढेर
(2 दिसंबर 2015) बुधवार का दिन है, सुबह के करीब 10 बज गये हैं, अब धूप निकल गयी है, वह तैयार हो गये हैं, साइट पर जाने की तैयारी है. फिर फोन बजता है, पहली घंटी में ही वह फोन रिसीव करते हैं, शायद उनसे कमरे से बाहर निकलने के लिए कहा जाता है, वह निकले भी, सामने सड़क है, सड़क क्राॅस करके वहीं खड़े हो जाते हैं. वह सड़क पर दूर तक नजर दौड़ाते हैं, जैसे किसी के आने का इंतजार कर रहे हों, लेकिन आगे से आने के बजाय दो लोग पीछे से आ कर सामने खड़े हो जाते हैं. ठीक चार कदम की दूरी पर. एक के हाथ में एके-47 है और हाथ की अंगुलियां ट्रिगर पर. यह मौत थी, जो सामने खड़ी थी और वह मौत के सौदागर, न भागना मुनासिब था और न बचना. गोलियाें की तड़तड़ाहट शुरू हुई, तो पेट से लेकर सीना छलनी हो गया.
शक मिटाने को दोबारा दागीं गोलियां
10 गोलियां झोंक दी गयीं. राजेंद्र मुंह के बल जमीन पर गिर गये, आसपास के पेड़ों पर मौजूद चिड़िया गोली की आवाज सुन कर आसमान में उड़ गयीं. दोनों हमलावर बाइक पर बैठे, दोनों ने अापस में बात की और फिर दोनों बाइक से उतर गये. दोबारा राजेंद्र को पांच गोलियां मारीं, शायद हमलावरों को राजेंद्र के जिंदा होने का शक था, जो दुबारा हमले से खत्म हुआ. हवा में असलहा लहराया, फायरिंग की और शिवहर-मुजफ्फरपुर मार्ग होकर निकल गये. चलता-फिरता आदमी पल भर में ढेर हो गया है.
सब अवाक… हर कोई स्तब्ध
अासपास भारी भीड़ है, सब अवाक, हर कोई स्तब्ध. खून से सनी लाश औ खोखे को लोग देख रहे हैं. राजेंद्र के हाथ में उनका मोबाइल है. लोग चर्चा कर रहे हैं कि फोन आया था, बात कर रहे थे और मर्डर कर दिया. अब समझ में आया कि मोबाइल फोन बजने पर राजेंद्र को टेंशन क्यों होती थी.
कभी रंगदारी की डिमांड, तो कभी जान से मार देने की धमकी. पर, वह अपनी जुबान बंद रखे हुए थे. दहशत उनके अंदर मौजूद थी और वह घूंट रहे थे. अब खेल खत्म हो चुका है. हाय-तौबा मची है. घटना स्थल से करीब आधा किलोमीटर की दूरी पर डीएम व एसपी के कार्यालय हैं. पूरा प्रशासनिक अमला मौके पर आ गया है.
यह तो आगाज है, अंजाम बाकी है…
नगर थानाध्यक्ष गणेश राम बरामदगी की सूची बनाने लगे. 21 खोखे मिले हैं, जो एके-47 के हैं. राजेंद्र के मोबाइल फोन को कब्जे में ले लिया गया है. इसी दौरान एक परचा बरामद होता है, उस पर बिहार पीपुल्स लिब्ररेशन आर्मी लिखा हुआ है. लाल रंग से दहशत भरी धमकी है… यह तो आगाज है, अंजाम अभी बाकी है, मुकेश पाठक जिंदाबाद, विकास कुमार जिंदाबाद. अब लाेग भी बताने लगे कि हमलावर मुकेश पाठक का नाम ले रहे थे और नारे लगा रहे थे.
अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी
अब जब राजेंद्र की मौत के बाद उसके नाम का परचा मिला, तो यह साफ हो गया कि मुकेश और उसके शूटरों ने यह खूनी खेल खेला है. पर, रंगदारी मांगने की शिकायत न तो कभी राजेंद्र ने पुलिस से की और न ही उनकी कंपनी ने. मामला अंदरखाने चल रहा था.
उनसे एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गयी थी और वह इस राशि को कम कराने के लिए कुछ लोगों से पैरवी करा रहे थे. देर होने पर मुकेश ने अपने शूटरों से राजेंद्र की हत्या करायी, ऐसी आशंका है. आशंका इसलिए कि राजेंद्र के साथ उनकी कंपनी में काम करनेवाले उनके पोते विजय प्रताप सिंह ने इस हत्या के संबंध में (कांड संख्या 269/15) जो केस दर्ज कराया है, उसमें हत्यारोपित अज्ञात हैं. इस मामले में मुकेश पाठक और विकास अप्राथमिक अभियुक्त हैं. पुलिस उन दोनों की तलाश कर रही है.
जुलाई से फरार है मुकेश
मुकेश और उसके गैंग का खौफनाक सफर अभी जारी रहेगा या फिर पुलिस इससे रोक पायेगी, इसका जवाब नाॅर्थ बिहार का हर शख्स जाना चाहता है. क्योंकि, मुकेश पाठक शातिर भी है और खतरनाक भी. यह वही शख्स है, जिसने 15 जुलाई, 2015 को अस्पताल का पुलिस सुरक्षा चक्रव्यूह तोड़ कर फरार हो गया था. उसे शिवहर मंडल कारागार से इलाज के लिए लाया गया था, उसने अस्पताल में ड्यूटी पर लगे सिपाहियों को नशीली मिठाई खिला कर बेहोश कर दिया था और अस्पताल से भाग निकला. तब से वह फरार चल रहा है.
(इनपुट- सीतामढ़ी से अमिताभ और शिवहर से जयप्रकाश सिंह)
बिहार पीपुल्स लिब्ररेशन आर्मी, संतोष झा चीफ ड्राइविंग सीट पर मुकेश
बिहार पीपुल्स लिब्ररेशन आर्मी (आपराधिक संगठन) का चीफ संतोष झा है. पर ड्राइविंग सीट पर मुकेश है. संतोष की सरपरस्ती में मुकेश के नाम का सिक्का चलता है. नाॅर्थ बिहार में बड़े प्रोजेक्ट पर काम करनेवाली कोई भी कंपनी बिना रंगदारी दिये, एक ईंट भी नहीं रख पाती है, जिसने पैसा नहीं दिया, उसने जान दे दी.
यह खौफनाक सिलसिला तब शुरू हुआ, जब वर्ष 2009 में संतोष झा और मुकेश पाठक ने हाथ मिला लिया. पहले संतोष नक्सली संगठन से जुड़ा था, लेकिन उत्तर बिहार के सबसे बड़ा नक्सली चेहरा गौरी शंकर झा से अनबन होने के बाद वह अलग हो गया. उसने अपना संगठन बनाया और उस समय पूर्वी व पश्चिमी चंपारण में दहशत का पर्याय बन कर उभर रहे मुकेश पाठक से गलबहियां कीं. दोनों करीब आये और संतोष के इशारे पर मुकेश ने जनवरी 2012 में गौरी शंकर को उनके आवास पर ही हत्या कर दी. शरीर में गोलियों की बौछार कर दी.
अपराध जगत की सुपर पावर दोस्ती
गौरी शंकर की हत्या से पहले 2010 में मोतिहारी के प्रखंड कार्यालय में मुखिया चंद्र किशोर ठाकुर उर्फ चुन्नू की हत्या कर मुकेश सुर्खियों में आया था. अब गौरी शंकर की हत्या के बाद संतोष और मुकेश की दोस्ती नाॅर्थ बिहार के अपराध जगत में सुपर पावर बन गयी, जो अब तक कायम है. रंगदारी नहीं देने के बाद हत्या समेत कुल 36 मामलों (15 जुलाई, 2015 तक) की पुलिसिया जीडी में शामिल मुकेश छोटे मामलों टांग नहीं अड़ाता है. 50 करोड़ से ऊपर के प्रोजेक्ट पर एक करोड़ की रंगदारी की वह डिमांड करता है.
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11 दिसंबर, 2010
मोतिहारी के प्रखंड कार्यालय में घुस कर मुखिया चंद्र किशोर ठाकुर उर्फ चुन्नू ठाकुर की मुकेश पाठक ने दिनदहाड़े गोली मार कर हत्या कर दी. इसी हत्या के बाद मुकेश का कद बढ़ गया. उसने पूर्वी व पश्चिमी चंपारण से निकल कर पूरे नॉर्थ बिहार में अपना दायरा बढ़ा लिया.
1 जून, 2011 
मारर घाट के पास सिंगला कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर गया बक्स सिंह, प्रोजक्ट इंजीनियर विकास कुमार मिश्र को एके-47 से भून दिया गया था. दोनों की मौत हो गयी थी और तीसरे प्रोजेक्ट इंजीनियर रामधीर पांडेय को भी गोली लगी थी, लेकिन वह इलाज के बाद बच गये. इसमें आंध्रा की इस कंपनी से एक करोड़ की रंगदारी मांगी गयी थी. नहीं देने पर संतोष झा और मुकेश पाठक के शूटर चिरंजीवी सागर अपने तीन गुर्गों के साथ मिल कर यह खूनी खेल खेला था.
जनवरी 2012 
उत्तर बिहार के हार्ड कोर नक्सली अौर बड़ा अापराधिक चेहरा रहे गौरी शंकर झा की जनवरी 2012 में शिवहर के पुरनहिया प्रखंड के दोस्तियां गांव में उनके आवास के बाहर हत्या की गयी थी. इसमें मुकेश पाठक खुद शामिल था. इस हत्या के बाद आपराधिक संगठन बिहार पीपुल्स लिब्ररेशन आर्मी के चीफ संतोष झा और मुकेश पाठक में नजदीकियां बढ़ गयीं.
2012
मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी वाया सोनबरसा के लिए नेशनल हाइवे टू लेन का निर्माण कर रही सी एंड सी कंपनी से एक करोड़ की रंगदारी मांगी गयी थी. पैसा नहीं देने पर वर्ष 2012 में कंपनी के सुपरवाइजर संजय कुमार की एके-47 से हत्या कर दी गयी थी.
2 दिसंबर, 2015
टेक्नो पावर विुद्यत कंपनी के सीनियर साइड सुपरवाइजर राजेंद्र प्रसाद सिंह की 2 दिसंबर, 2015 को शिवहर के नगर थाना क्षेत्र के विंध्यवासिनी नगर मुहल्ले में आवास के सामने दिन दहाड़े एके-47 से मौत के घाट उतार दिया. घटना के संगठन का परचा मिला है, जिस पर मुकेश पाठक और विकास का नाम है.
ये हैं गैंग के शूटर
बिहार पीपुल्स लिब्ररेशन आर्मी का चिरंजीवी सागर शूटर है. वह चीफ संतोष झा का दायां हाथ है. अभी वह केंद्रीय कारागार गया में बंद है. इसके अलावा अभिषेक मिश्रा, लंकेश झा, आमित पांडेय, निकेश दूबे, विकास चिरंजीवी के सहयोगी शूटर हैं.
Source: Prabhat Khabar

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