गौरैया और हमारा बचपन मानो एक से थे

sparrow-day
हम भी छोटे वो भी छोटी
जब हम धुनमुन-धुनमुन करते थे
तो वो चुनमुन-चुनमुन करती थी!
 
जब आँगन में बैठी मेरी मैया सुप में चावल चुनती थी,
तब वो छोटी चटक चिड़ैया हर दाने को चुगती थी!
मैं भी उसके संग संग मैया से लड़ता था,
पलक झपकने की देर थी बड़ी शरारत करता था!
 
गौरैया और हमारा बचपन मानो एक से थे!
 
जब हम अपने नाजुक पैरो से अँगने में घूमा करते थे,
फुदक-फुदक कर संग हमारे वो भी घुमा करती थी!
हम माँ के दिल में थे तो वो थी माँ की लोरी में,
मिट्टी खाने पे कभी हम पिटते तो वो पिटती चावल की चोरी में!
 
बचपन बिता दिन बीतें और बीत गए कुछ साल,
उस चुनमुन सी चिड़िया का अब ठीक नहीं कुछ हाल!
 
आज ना वो हँसता खेलता आँगन है
और ना ही है वो गौरैया,
उसकी जगह आ गयी है कोई एंग्री सी चिड़ैया!
 
गाँव की अल्हड़ मस्तियाँ शहरों की चकाचौंध में खो सी गयी है,
बचपन की वो शरारतें कहीं सो सी गयी हैं!
 
आओ मिलकर लौट चलें फिर से उन खेत और खलिहानों में,
आम के बागानों में और गौरैया के गानों में !
 
कवि:सुधाकर चौधरी
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विश्व गौरैया दिवस पर उस चिड़िया के लिए लिखे गए ये शब्द आपको अपने बचपन की याद जरूर दिलायेंगे!
With the recommendation of Sudhakar Chaudhary
Krishna Kumar
The state of Bihar has given a lot to the history of humanity but in recent past we had given child labour, women harresment, theft, murder and corruption. I am here to raise the voice.!

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