जोगीरा सा रा रा रा – होली स्पेशल

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आर्जवर्त में चार ठो खंभाचारो को घुन खाय
साहेब बैठि अदानी के घर घंटा रहे बजाय
कि खूंटा यहीं गड़ेगा…
जोगीरा सा रा रा रा
अमरीकी आका के आगेपोंछिया रहे डोलाय
मुदित मीडिया ओबामा संगफोटो पे बलखाय
कि खूंटा यहीं गड़ेगा…
जोगीरा सा रा रा
कैसे उपजे दूध चिरौंजी, कहवां से सिल-बट्टा
कौन लंठ है पीसनवारा, रंग करे सब खट्टा
कि खूंटा यहीं गड़ेगा…
जोगीरा सा रा रा रा
मेहनत उपजे दूध-चिरौंजी, खनन मिले सिल-बट्टा
फेंकुआ साहेब पीसनवारा, रंग करे सब खट्टा
कि खूंटा यहीं गड़ेगा…
जोगीरा सा रा रा रा
केकरे आगे साहेब लोटें देखते कटे उदासी ।
साहेब के साहेब के साहेब कौन देस के बासी
कि खूंटा यहीं गड़ेगा…
जोगीरा सा रा रा रा
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अनिल के आगे साहेब लोटें देखते कटे उदासी ।
साहेब के साहेब के साहेब अमरीका के वासी
कि खूंटा यहीं गड़ेगा…
जोगीरा सा रा रा रा
साधू साध्वी कुंठा बूकें जोगी हौ दंगाई ।
केकरे घर में जग्ग होत है केकर चाम चोराई
कि खूंटा यहीं गड़ेगा… जोगीरा सा रा रा रा
साधू साध्वी कुंठा बूकें जोगी हौ दंगाई
अंबानी घर जग्ग होत है हमरा चाम चोराई ॥
कि खूंटा यहीं गड़ेगा…
जोगीरा सा रा रा रा
केकरे खपड़ा मोथा जामे केकरे जमे मकोय
दूध दही सूसू घी टट्टी के खाये सुख होय
रसीले पंचगव्य की जय,
बुद्धि के विंध्याचल की जय, 
जोगीरा सा रा रा रा …
रामदेव के मोथा जामे, साध्वी घरे मकोय
दूध दही सूसू घी टट्टी संघिन के सुख होय
रसीले पंचगव्य की जय,
बुद्धि के विंध्याचल की जय, 
जोगीरा सा रा रा रा …
आसमान में बांस खोंस दें खोंस जनेऊ कान
फेसबुक पर पिंगल झारें बड़े बड़े बिदवान
कि खूंटा यहीं गड़ेगा …
जोगीरा सा रा रा रा
भोरे बिहाने कुत्ता बोले, सांझा बोले कागा
फेसबुकी सब कथरी सीवें बिन सुई बिन धागा
कि खूंटा यहीं गड़ेगा …
जोगीरा सा रा रा रा
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मैं मैं मैं मैं मेरा मुझको मुझसा मेरी मेरा
मद में मातल ई दंगाई जड़ में माठा घोरा
कि खूंटा यहीं गड़ेगा …
जोगीरा सा रा रा रा
बजट बकैती ठेलूँ मैं तुम कान पकड़ कर उठ बैठो 
पीठ तुम्हारी सदा सोहागिन डंटा मेरे बाप का
कि खूंटा यहीं गड़ेगा  
जोगीरा सा रा रा रा

देस नदी में जनता मछरी कार्पोरेट मछेरे सब 
गलफर चीर के जो घुस जावे कंटा मेरे बाप का 
कि खूंटा यहीं गड़ेगा  
जोगीरा सा रा रा रा

चकवढ़ खावो हवा पियो तुम हम बिकास ठेलवाते हैं
गोंहूचावल, मैदा मिसिरी भंटा मेरे बाप का
कि खूंटा यहीं गड़ेगा  
जोगीरा सा रा रा रा
जै बिकास के ललका चाउर जै बतरा का पतरा
तर्क-बुद्धि पे खेत-खान पे अर्धपैंट का खतरा
कि खूंटा यहीं गड़ेगा …
जोगीरा सा रा रा रा
बानर बाहर बानर भीतर बनरन के सरकार
लिहो लिहो होली के नारा चोइंटा देई झार 
कि खूंटा यहीं गड़ेगा …
जोगीरा सा रा रा रा
-मृत्युंजय 

जोगीरा सर रर… रर… रर… 2


फागुन के महीना आइल ऊड़े रंग गुलाल।

एक ही रंग में सभै रंगाइल लोगवा भइल बेहाल॥

जोगीरा सर रर… रर… रर…


गोरिया घर से बाहर ग‍इली, भऽरे ग‍इली पानी।

बीच कुँआ पर लात फिसलि गे, गिरि ग‍इली चितानी॥

जोगीरा सर रर… रर… रर…


चली जा दौड़ी-दौड़ी, खालऽ गुलाबी रेवड़ी।

नदी के ठण्डा पानी, तनी तू पी लऽ जानी॥

जोगीरा सर रर… रर… रर…


चिउरा करे चरर चरर, दही लबा लब।

दूनो बीचै गूर मिलाके मारऽ गबा गब॥

जोगीरा सर रर… रर… रर…


सावन मास लुग‍इया चमके, कातिक मास में कूकुर।

फागुन मास मनइया चमके, करे हुकुर हुकुर॥

जोगीरा सर रर… रर… रर…

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एक त चीकन पुरइन पतई, दूसर चीकन घीव।

तीसर चीकन गोरी के जोबना, देखि के ललचे जीव॥

जोगीरा सर रर… रर… रर…


भउजी के सामान बनल बा अँखिया क‍इली काजर।

ओठवा लाले-लाल रंगवली बूना क‍इली चाकर॥

जोगीरा सर रर… रर… रर…


ढोलक के बम बजाओ, नहीं तो बाहर जाओ।

नहीं तो मारब तेरा, तेरा में हक है मेरा॥

जोगीरा सर रर… रर… रर…


बनवा बीच कोइलिया बोले, पपिहा नदी के तीर।

अंगना में भ‍उज‍इया डोले, ज‍इसे झलके नीर॥

जोगीरा सर रर… रर… रर…


गील-गील गिल-गिल कटार, तू खोलऽ चोटी के बार।

ई लौण्डा हऽ छिनार, ए जानी के हम भतार॥

जोगीरा सर रर… रर… रर…


आज मंगल कल मंगल मंगले मंगल।

जानी को ले आये हैं जंगले जंगल॥

जोगीरा सर रर… रर… रर…


कै हाथ के धोती पहना कै हाथ लपेटा।

कै घाट का पानी पीता, कै बाप का बेटा?

जोगीरा सर रर… रर… रर…

Sanskriti
A girl from the capital of Bihar, trying to understand the past underdevelopment of Bihar and exploring the ways to improve the status of the State

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