नवरात्रः देवी भगवती का नौवां स्वरूप है सिद्धिदात्री

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सौभाग्य, धन-संपदा, सौंदर्य और स्त्री जनित गुणों की अधिष्ठात्री देवी महागौरी हैं. अठारह गुणों की प्रतीक महागौरी अष्टांग योग की अधिष्ठात्री भी हैं. वह धन-धान्य, गृहस्थी, सुख और शांति प्रदात्री हैं.

भगवान शिव ने काली जी पर गंगाजल छिड़का, तो वह महागौरी हो गईं. महागौरी ही अक्षत सुहाग की प्रतीक देवी हैं. इनकी पूजा का श्लोक है- सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सवार्थसाधिके शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते.

देवी भगवती का नौवां स्वरूप सिद्धदात्री का है. मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्रकाराम्य, ईशित्व और वशित्व ये आठ प्रकार की सिद्धियां कही गईं हैं. जिस साधक ने इनको प्राप्त कर लिया वह सुख-समृद्धि का प्रतीक हो गया. यह महालक्ष्मी जी का ही स्वरूप है.

इनकी आराधना के साथ ही नवरात्र व्रत का पारायण होता है. सिद्धिदात्री देवी पूजन के साथ कन्या भोग और यज्ञ का विशेष फल मिलता है. इनकी पूजा का मंत्र है-

या देवि सर्वभूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम

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