बाटे बेटी के बियहवा भारी भार हो गइल

images

कइसन घर बर मिली कहाँ से धन दहेज के आयी ।
कइसन मिलिहें सासु ननद जहवाँ बेटी बियहायी ।
भारी चिन्ता एगो माथापर सवार हो गइल ।
बाटे बेटी के बियहवा भारी भार हो गइल ।।

केतने सोर्स लगाके टीपन गैल दुचारि मँगावल ।
लेकिन सगरे व्यर्थ भइल गनना जब बइठि न पावल ।
फेरु से देखे के अब दोसरे दुवार हो गइल ।
बाटे बेटी के बियहवा भारी भार हो गइल ।।

गगना कहीं बनल तब बेटिहा धावल उहवाँ गइले ।
आ बेटहा मालिक का गोड़े पर जा के भहरइले।
बेटिहा मुलजिम भइले बेटहा थानेदार हो गइल ।
बाटे बेटी के बियहवा भारी भार हो गइल ।।

बेटहा सोचले कि हम एतना धनिक और खन्दानी ।
इनका बेटी से जब आपन बेटा बियहत बानीं ।
त हमरे हाथे इनके भारी उपकार हो गइल ।
बाटे बेटी के बियहवा भारी भार हो गइल ।।

जेतना बेटहा मँगले ओतना बेटिहा सजी सकरले ।
नाकुर-नुकुर ना कुछ कइले जिउ का ज्यादे जरले ।
सिंह का आगे डर का मारे चुप सियार हो गइल ।
बाटे बेटी के बियहवा भारी भार हो गइल ।।

भइल बरच्छा तिलक चढ़ल भारी बरियात सजाइल ।
सोमनाथ के लूटे मनु महमूद गजनवी आइल ।
बेटिहा मंदिर के पुजारी सम लाचार हो गइल ।
बाटे बेटी के बियहवा भारी भार हो गइल ।।

पहिली रात बरात समूचा बिना मनावल खाइल ।
पर माँग बेटहा के भर के कन्या के माँग भराइल ।
लगभग आधा सागर बेटिहा अबतक पार हो गइल ।
बाटे बेटी के बियहवा भारी भार हो गइल ।।

बेटहा पनही में होला कड़ियलपन के अधिकाई ।
बेटिहा तब सोचे लागेला कइसे ऊ नरमाई ।
बिहाने तेल भेजल तब जरूरी कार हो गइल ।
बाटे बेटी के बियहवा भारी भार हो गइल ।।

बेटहा पनही में जो होई बहुते अधिक कड़ाई ।
तब मानल बात हवे कि बेटिहा ना तनिको चलि पाई ।
रस्ता अइसन बा बियाह के काँटेदार हो गइल ।
बाटे बेटी के बियहवा भारी भार हो गइल ।।

धीरे-धीरे तेल मलत ऊ सगरे तेल ओराइल
लेकिन ना जाने कि काहें तनिको ना नरमाइल ।
उलटे बेटिहा के पद काटे के लगार हो गइल ।
बाटे बेटी के बियहवा भारी भार हो गइल ।।

धोती बेटिहा का घर से जब आइल तबे नहइले ।
एही धोती का भरोस पर बेटहा घर से अइले ।
धोती पइते ना तS रहीते ऊ उधार हो गइल ।
बाटे बेटी के बियहवा भारी भार हो गइल ।।

लाठी भाला बरछी बनूखि आ मोटर घोड़ा हाथी ।
हीत नात परिवार निजी आ सब अधिकाजन साथी ।
जनवासा सेना के पड़ाव उजियार हो गइल ।
बाटे बेटी के बियहवा भारी भार हो गइल ।।

बिजयी सेना में अब उत्सव होखे लागल भारी ।
छूटे लागल बाढ़ि और सब नाचरंग भी जारी ।
सेना वीर पान कइल आ मदार हो गइल ।
बाटे बेटी के बियहवा भारी भार हो गइल ।।

दुसरी रात भात खाये के बात सुने ना चाहें ।
देखते अगुवा आ बेटिहा के बरिस परें अगताहें ।
बेटहा का हाई टेम्प्रेचर के बुखार हो गइल ।
बाटे बेटी के बियहवा भारी भार हो गइल ।।

रामबाण रुपया इन्जेक्शन देके जर उतराइल ।
तब कइसों उनका एक थरिया बारा भात घोटाइल ।
तब तक राति बीते लागल भिनुसार हो गइल ।
बाटे बेटी के बियहवा भारी भार हो गइल ।।

तिसरा दिनें बिहाने बेटिहा धरती बान्हे धइले ।
तब बेटहा समधी मड़वा के बान्हा खोले गइले ।
बिदा होत में बरात खुँटा उजार हो गइल ।
बाटे बेटी के बियहवा भारी भार हो गइल ।।

अब से बेटिहा का सब दिन नइ के परी रहे के ।
बेटिहा कुल का बेटहा कुल के बाटे रोब सहेके ।
किनल गुलाम अब से बेटिहा सपरिवार हो गइल ।
बाटे बेटी के बियहवा भारी भार हो गइल ।।

जनम मरन में आ बिआह में जब जब बेटहा आई ।
तब-तब बेटिहा का जरूर देबे के परी बिदायी ।
सब दिन लूटे खातिर बेटहा का सुतार हो गइल ।
बाटे बेटी के बियहवा भारी भार हो गइल ।।

केतने लड़की कम दहेज में ससुरा में चलि अइलि ।
तब उहाँ सासु द्वारा ऊ एतना अधिक सतावल गइली ।
कि आत्महत्या कैले साँसति से उबार हो गइल ।
बाटे बेटी के बियहवा भारी भार हो गइल ।।

कई सासु अपना पतोहि के अपने करे जरावें ।
आ चूल्हा बारत के दुर्घटना कहिके गाल बजावें ।
आँसू बरसे मनवाँ हरसे चेतल कार हो गइल ।
बाटे बेटी के बियहवा भारी भार हो गइल ।।

“रानी हमार का भइली आइल कवन नगरिया लूटे।”
कहि-कहि गिरें और मूर्छा के तार कबे ना टूटे ।
जगत में जाहिर माहिर सासु के दुलार हो गइल ।
बाटे बेटी के बियहवा भारी भार हो गइल ।।

सेवा के उपदेश बधू के सगरे लोग सुनावे ।
ओकर का अधिकार हवे ई बात न किन्तु बतावे ।
मानों सेवा में बिलीन ओकर अधिकार हो गइल ।
बाटे बेटी के बियहवा भारी भार हो गइल ।।

केतने लोग दहेज बिरोधी भाषण खूब सुनावें ।
लेकिन अपने बेटहा बने त ओके हटा न पावें ।
ई दहेजवा जमनछव के कास्तकार हो गइल ।
बाटे बेटी के बियहवा भारी भार हो गइल ।।

यद्यपि दोष दहेज प्रथा में कहल गइल बा ज्यादा ।
लेकिन एके तूरे के ना भइल इरादा वादा ।
पहिले आगे चले के ना केहु तइयार हो गइल ।
बाटे बेटी के बियहवा भारी भार हो गइल ।।

पारा पारी ई दहेज दुख सबका परत कपारे ।
पर दहेज के करत उलंघन सबके हिम्मत हारे ।
ई दहेजवा मानों चीन के दीवार हो गइल ।
बाटे बेटी के बियहवा भारी भार हो गइल ।।

कई बार सरकारो एके तूरे के सरियइल ।
तब मेन गेट तजि बैक डोर से चुपके से चलि आइल ।
हार मानि अब चुपचाप बा सरकार हो गइल ।
बाटे बेटी के बियहवा भारी भार हो गइल ।।

दहेजवा जादू के बा भारी एगो खेल हो गइल ।
एकरा आगे सबके अक्किल बाटे फेल हो गइल ।
कवनों लउकत ना उपाय बा अन्हार हो गइल ।
बाटे बेटी के बियहवा भारी भार हो गइल ।।

— धरीक्षण मिश्र

Dharikshan Mishr.jpg

Comments

comments