बिहारी लोकगीत: दू रंग नीतिया काहे कईल हो बाबू जी

Girl bihar gap

बिहारी लोकगीत

एके कोखी बेटा जन्मे एके कोखी बेटिया
दू रंग नीतिया काहे कईल हो बाबू जी
दू रंग नीतिया,

बेटा के जनम में त सोहर गवईल अरे सोहर गवईल
हमार बेरिया, काहे मातम मनईल हमार बेरिया
दू रंग नीतिया
काहे कईल हो बाबू जी
दू रंग नीतिया,

बेटा के खेलाबेला त मोटर मंगईल अरे मोटर
मंगईल
हमार बेरिया, काहे सुपली मऊनीया हमार बेरिया
दू रंग नीतिया
काहे कईल हो बाबू जी
दू रंग नीतिया,

बेटा के पढ़ाबेला स्कूलिया पठईल अरे
स्कूलिया पठईल
हमार बेरिया, काहे चूल्हा फूँकवईल हमार बेरिया
दू रंग नीतिया
काहे कईल हो बाबू जी
दू रंग नीतिया,

बेटा के बिआह में त पगड़ी पहिरल अरे पगड़ी
पहिरल
हमार बेरिया, काहे पगड़ी उतारल हमार बेरिया
दू रंग नीतिया
काहे कईल हो बाबू जी
दू रंग नीतिया,

एके कोखी बेटा जन्मे एके कोखी बेटिया
दू रंग नीतिया
काहे कईल हो बाबू जी दू रंग नीतिया.

Sanskriti
A girl from the capital of Bihar, trying to understand the past underdevelopment of Bihar and exploring the ways to improve the status of the State

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