बिहार का यह स्कूल है टॉपर्स की फैक्ट्री!

Bihar School 42 students in Top 10

बिहार के एक ऐसे स्कूल की जिसकी चर्चा आज पूरे देश में हो रही है. बिहार बोर्ड के 10वीं के नतीजों में जमुई के इस स्कूल ने बिहार के सभी स्कूलों को पीछे छोड़ दिया है. जमुई के सिमुलतला स्कूल के 42 छात्र टॉप टेन में आए हैं. 

टॉपर्स की फ़ैक्ट्री! बिहार के एक ही स्कूल के बच्चोँ ने ऐसा कारनामा कर दिखाया कि उसे जो भी सुनता है वो हैरत मेँ पड़ जाता है कि ऐसा भी संभव है. सिमुलतला आवासीय विद्यालय के 42 छात्र बिहार बोर्ड के मैट्रिक परीक्षा मेँ एक साथ टॉप कर गए.

यह लगातार दूसरा वर्ष है जब सिमुलतला आवासीय विद्यालय के छात्र मैट्रिक के रिजल्ट में छाए रहे हैं। 2015 में भी स्टेट टॉप टेन में 31 छात्रों ने जगह बनाई थी जिनमें से 30 इसी स्कूल के थे।

राज्य सरकार ने नेतरहाट की तर्ज पर जमुई में सिमुलतला आवासीय विद्यालय की नींव रखी थी और बीते दो साल के रिजल्ट में इस स्कूल के छात्रों ने सबसे बढ़िया रिजल्ट दिया है।

हालांकि अगले दो साल इस स्कूल के छात्र मैट्रिक की परीक्षा में शामिल नहीं हो पाएंगे क्योंकि स्कूल में सत्र 2013-14 और 2014-15 में प्रवेश परीक्षा नहीं हो पाई थी। इस वजह से इन सत्रों में दाखिला नहीं हो पाया।

सिमुलतला के इस स्कूल मेँ टीचर की कमी है. अपनी ज़मीन नहीँ है. किराए पर सब कुछ चल रहा है. सुविधा तो है पर आधी अधूरी पर जज़्बा बहुत है. कैसे बने ये टॉपर आप ही सुनिए इनकी ज़ुबानी. टीचर ने कैसे मदद की ये भी जानिए.

सिमुलतला मेँ कभी रविंद्र नाथ टैगोर ,शरद चंद चट्टोपाध्याय , विवेकानँद जैसी हस्तियाँ स्वास्थ्य लाभ लेने और किताबेँ लिखने आया करते थे. इस जगह को बिहार सरकार ने सोच समझ कर चुना था. पर सरकार का ध्यांन ऊतना नहीँ रहा पाया. आज भी काफ़ी ध्यान देने की ज़रूरत है.

बिहार का नेतरहाट कहे जाने वाले सिमुलतला आवासीय विद्यालय, जमुई के तमाम छात्रों ने मैट्रिक में बेहतर रिजल्ट देकर यह साबित कर दिया है कि सही मार्गदर्शण और परिवेश मिले तो छात्र हर कठिनाई पर विजय पा सकते हैं.

इस विद्यालय के छात्रों ने न सिर्फ सीबीएसइ 10वीं बोर्ड के टॉपर से अधिक अंक प्राप्त किए, बल्कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के 1952 के रिजल्ट का भी रिकॉर्ड तोड़ा. समिति से मिली सूचना के अनुसार, 1952 में 96 परसेंट पर टॉपर को मार्क्स आए थे.

इसके बाद के तमाम वर्षों में इतने मार्क्स किसी भी टॉपर को नहीं आए, हमेशा 90 से 95 परसेंट के बीच टॉपर के अंक होते थे. लेकिन इस बार सिमुलतला के छात्रों ने 97.40 फीसदी अंक प्राप्त कर समिति के रिजल्ट का रिकॉर्ड तोड़ा है. 2015 में सीबीएसै बोर्ड के पटना रिजन में 10वी बोर्ड के टॉपर छात्र को 92 सीजीपीए आया था, लेकिन बिहार बोर्ड के टॉपर नीरज और कुणाल ने उन्हें पीछे छोड़ दिया है.

बिहार से झारखंड के अलग होने के बाद नेतरहाट स्कूल झारखड के हिस्से में चला गया था. इसके बाद तत्कालीन सीएम नीतीश कुमार ने अगस्त 2010 में इसकी स्थापना की थी. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह का कहना है कि सभी उत्तर्पुस्तिकाओं पर उत्तर काफी अच्छे से लिखे हुए थे, इस कारण इतना अंक देने को परिक्षक मजबूर हो गए.

11 शिक्षकों ने 120 छात्रों पर मेहनत की. छात्रों का सुबह चार बजे से रात के नौ बजे तक का समय शिक्षकों के साथ ही गुजरता है. इससे छात्रों की जिज्ञासा हमेशा पूरी हो जाती है. छठी में नामांकन के बाद छात्रों का दो महीने टेस्ट लिया जा ता है, इससे छात्र की काबिलियत का पता चलता है.

सिमुलतला आवासीय विद्यालय में हर बोर्ड के सिलेबस पर फोकस किया जाता है. छात्रों को हर चीज का ज्ञान हो, इसके लिए सीबीएसै के अलावा आइसीएसइ बोर्डों के सिलेबस को भी पढ़ाया जाता है. जब विद्यालय खुला था, तो यह सीबीएसइ बोर्ड पर आधारित था. लेकिन बाद में यह बिहार बोर्ड से जुड़ गया. पर, आज भी हर बोर्ड के सिलेबस को फॉलो किया जाता है.

आठवीं तक छात्रों को सीबीएसइ, आइसीएसइ की हर किताब से प्रक्टिस करवाया जाता है. नौवीं से बिहार बोर्ड पर फोकस किया जाता है. नौवीं से ही छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करना शुरू कर दिया जाता है.

सफलता के मूल मंत्र

1. रेमेडियल क्लास: इसके अंतर्गत ऐसे छात्रों को चुना जाता है, जो किसी विषय में कमजोर होते हैं. छठी क्लस में ही ऐसे छात्रों को चुन लिया जाता है. जो छात्र जिस भी विषय में कमजोर होता है, उसके ऊपर विद्यालय के शिक्षक अलग से समय देते हैं. सप्ताह में तीन दिन दो घंटे का रेमेडियल क्लास आयोजित किया जाता है.

2. इच वन, टीच वन: गांधी जी की सोच पर आधारित इस स्टडी के तहत जूनियर बच्चों को सिमुलतला के छात्र पढ़ाते हैं. बच्चों में समाजसेवा का भाव आए, इसके लिए झाझा ब्लॉक के जितने भी बच्चे होते हैं, उन्हें सिमुलतला के छात्र हर दिन तीन घंटे पढ़ाते हैं. इससे छात्रों की प्रैक्टिस भी हो जाती है.

3. श्रुति लेख: इसके तहत हर दिन एक एसा क्लास होता है, जिसमें छात्रों को एक साथ जोर-जोर से पढ़ने को कहा जाता है. इससे छात्रों का उच्चारण बढ़ता है और झिझक मिटती है. हर प्रयोग हर क्लास के लिए करवाया जाता है. एक घंटे के इस क्लास में हर छात्र को बोल कर पढ़ने के लिए कहा जाता है.

4. खुद करें अपना काम: विद्यालय में गुरुकुल परंपरा अपनायी गयी है. इस कारण यहां पर छात्रों को खाना बनाने और परोसने का भी काम दिया जाता है. छात्रों का पूरा विकास हो, छात्रों में व्यावहारिकता आए, इस कारण खुद से ही सारा काम करवाया जाता है.

स्कूल की शुरुआत में सभी अच्छे संस्थानों से फीडबैक लिया गया था. बेसिक सुविधाओं की भले कमी हो, लेकिन यहां पर शिक्षा का माहौल ऐसा है कि हर छात्र का एक समान विकास हो. शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी रखा गया है ताकि आगे चलकर बच्चों को कोई परेशानी ना हो.

सबसे अहम बात यह है कि फीस अभिभावक के आमदनी पर निर्भर करता है. 1.5 लाख सलाना इनकम वाले पैरेंट्स के बच्चों को मुफ्त शिक्षा दिया जाता है. इसके अलावा फीस के लिए कई स्लैब है. सबसे ज्यादा 15 लाख से ज्यादा इनकम वाले परिवार के लिए लड़के का फीस 1 लाख 80 हजार है और लड़की के लिए एक लाख सलाना फीस है.

Krishna Kumar
The state of Bihar has given a lot to the history of humanity but in recent past we had given child labour, women harresment, theft, murder and corruption. I am here to raise the voice.!

Comments

comments