बिहार में कमज़ोर स्टूडेंट्स का पता लगाने के लिए फिर से होगी 8वीं की परीक्षा

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29 और 30 मार्च को राज्य के सरकारी स्कूलों में राज्य स्तर पर 8वीं की परीक्षा ली जाएगी। सरकार की तरफ से इस तरह की परीक्षा की जानकारी अचानक आई है। इस परीक्षा का उद्देश्य स्टूडेंट्स की शैक्षणिक क्षमता का मूल्यांकन करना है। हांलाकि इस परीक्षा में किसी भी स्टूडेंट को फेल नहीं किया जाएगा।

 

सरकार का कहना है कि इस तरह की परीक्षा से इस बात का पता चल सकेगा कि कितने स्टूडेंट्स पढ़ाई में कमजोर हैं। इसके बाद उन स्टूडेंट्स पर 9वीं कक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। 100 अंकों की परीक्षा में स्टूडेंट्स से ऑब्जेक्टिव और सब्जेक्टिव दोनों तरह के सवाल पूछे जाएंगे।

 

गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और हिंदी या उर्दू में से किसी एक भाषा की परीक्षा देनी होगी। परीक्षा का परिणाम 10 अप्रैल तक आने की उम्मीद है। परिणाम के बाद विद्यार्थियों को ए, बी, सी श्रेणी में बांटा जाएगा।

 

परीक्षा की ज़िम्मेदारी बिहार शिक्षा परियोजना परिषद को दी गई है। इसके पहले भी राज्य स्तर पर 8वीं बोर्ड की परीक्षा हुआ करती थी लेकिन इस बार ली जा रही परीक्षा को बोर्ड परीक्षा का स्वरूप न देते हुए सिर्फ स्टूडेंट्स के मूल्यांकन का आधार बनाया गया है।

 

हांलाकि इस तरह से सरकार के अचानक से आए फैसले से कुछ स्कूल प्रशासन नाराज़ भी नज़र आ रहे हैं। पटना के कई स्कूलों में 8वीं की वार्षिक परीक्षा भी हो चुकी है। होली की छुट्टी के पहले ही परीक्षा संपन्न कराई जा चुकी थी। परीक्षा ख़त्म होने के कारण काफी स्टूडेंट्स गांव या दूसरे शहर छुट्टी मनाने भी जा चुके थे। इस तरह के आदेश के बाद बच्चों को सूचित करना भी मुश्किल हो रहा था।

 

पटना के एक सरकारी स्कूल की प्राचार्या ने नाम न बताने कि शर्त पर कहा कि अगर इस तरह का आदेश आना ही था तो पहले इसकी जानकारी दे देनी चाहिये थी। एक ही कक्षा की परीक्षा को दो बार लिए जाने का कोई मतलब नहीं है। इससे विद्यार्थी और टीचर्स दोनों की परेशानी बढ़ी है।

Source: DNA India

Krishna Kumar
The state of Bihar has given a lot to the history of humanity but in recent past we had given child labour, women harresment, theft, murder and corruption. I am here to raise the voice.!

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