बिहार में ताड़ी पर राजनीति तेज, पासवान ने कहा – पूरे राज्‍य में करेंगे आंदोलन

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लोक जनशकित पार्टी के राष्ट्रीय अध्‍यक्ष रामविलास पासवान ने घोषणा की कि पासी समाज के ताड़ी के धंधे पर अंकुश लगने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ उनकी पार्टी पूरे राज्य में आंदोलन करेगी।

पासवान पटना में अंबेडकर जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में ये घोषणा की। पासवान ने चेतावनी देते हुआ कहा कि राज्य सरकार नौटंकी कर रही है, गरीब के नाम पर छुरा चला रही है। पासवान ने कहा कि अभी तक उन्होंने सरकार को छेड़ा नहीं है लेकिन छेड़ेंगे तो छोड़ेंगे भी नहीं।

पासवान से पहले पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी और बीजेपी नेता सुशील मोदी ने भी राज्य सरकार पर पासी समाज को उनके पारम्परिक काम से शराब बंदी के नाम पर वंचित करने का आरोप लगाया था।

हालांकि पासवान के भाषण से पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अंबेडकर जयंती के एक सरकारी कार्यक्रम में साफ़ किया कि कुछ लोग ताड़ी के नाम पर राजनीति कर रहे हैं। ताड़ी पर कोई रोक नहीं है। लेकिन सरकार चाहती है कि ताड़ी नहीं बल्कि नीरा की बिक्री हो और इसके लिए राज्य सरकार अगले साल से अपने सुधा ब्रांड के तहत नीरा की खरीद बिक्री करेगी जिससे इस धंधे में लगे लोगों को काफी आर्थिक लाभ होगा।

लेकिन उन्होंने कहा की वो नहीं चाहते कि पासी समाज के लोग केवल अपने परंपरागत धंधे से चिपके रहें और ये मानसिकता गलत है बल्कि उनका प्रयास है कि इस समाज के लोग ज्‍यदा से ज्यादा सरकारी नौकरियों में शामिल हों। नीतीश ने अपने राजनीतिक विरोधियों पर व्‍यंग्‍य करते हुए कहा कि दुनिया चांद सितारों पर जाने का प्रयास कर रही है और हमारे विरोधी दलित समाज के पासी भइयों को पेड़ से ताड़ी निकालते देखना चाहते हैं।

लेकिन नीतीश ने माना कि सूर्योदय के बाद ताड़ी में यूरिया और मंड्रॉक्स मिलाकर जो ताड़ी बेची जाती है वो ज़हरीली हो जाती है जिसकी खरीद बिक्री की अनुमति नहीं दी जा सकती। नीतीश ने साफ़ किया कि फ़िलहाल बिहार में ताड़ी बेचने के जो भी नियम हैं वो 1991 से राज्य में लागू हैं और उसमें कोई फेरबदल नहीं किया गया है।

निश्चित रूप से पासी समाज जो बिहार में महादलित समुदाय में आता है, उसे ताड़ी पर पाबन्दी के नाम पर नीतीश विरोधी दल गोलबंद करने का प्रयास कर रहे हैं और इस मुद्दे पर नीतीश सफाई देकर और अगले एक साल के अंदर सहकारी संगठनों के माध्‍यम से इस समुदाय को अपनी ओर एकजुट करने में लगे हैं।

ताड़ी पर प्रतिबंध लगाना दलितों पर जुल्मः मांझी

पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि ताड़ी प्राकृतिक पेय है। इस पर पाबंदी दलितों पर ज़ुर्म है। पासी जाति के लोगों का रोजगार नहीं छीनना चाहिए। उनके लिए जीवन बीमा करवाना चाहिए। श्री मांझी ने ये बातें सोमवार को ताड़ी विक्रेता संघ की ओर से आयोजित जनसभा में कही।

विकल्प खोजें
उन्होंने कहा कि सरकार को बिना विकल्प खोजे ताड़ी पर प्रतिबंध नहीं लगाना चाहिए था। ताड़ी शराब नहीं है। इस पर प्रतिबंध आईएएस केके पाठक की देन है।

गरीबों के लिए ज़रूरी
नीतीश कुमार ने बिना परामर्श के श्री पाठक के कहने पर प्रतिबंध लगा दिया। जबकि महुआ और ताड़ी गरीबों को सेहतमंद बनाने के लिए जरूरी है।

सब जगह मिलावट
मांझी ने कहा कि आज ताड़ी सिर्फ पासी जाति के लोगों का व्यवसाय नहीं रहा। यह आदिवासियों, अत्यंत पिछड़ी जातियों का भी व्यवसाय बन चुका है। सरकार ताड़ी में मिलावट की बात कहती है, लेकिन दूध, सब्जी, खोआ अधिकतर चीजों में मिलावट है।

77 में भी लगी थी रोक
इंजेक्शन लगाकर दूध निकाला जा रहा है। सरकार क्या इन पर भी प्रतिबंध लगाएगी। वर्ष 1977 में भी ताड़ी पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया था।\

Source: NDTV and Hindustan

 

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