माई

MotherandChild_LayersofLove

अबो जे कबो छूटे लोर आंखिन से
बबुआ के ढॉंढ़स बंधावेले माई
आवे ना ऑंखिन में जब नींद हमरा त
सपनो में लोरी सुनावेले माई

बाबूजी दउड़ेनी जब मारे-पीटे त
अंचरा में अपना लुकावेले माई
छोड़ीना, बबुआ के मन ठीक नइखे
झूठहूं बहाना बनावेले माई

ऑंखिन का सोझा से जब दूर होनी त
हमरे फिकिर में गोता जाले माई
आंखिन का आगा लवटि के जब आई त
हमरा के देखते धधा जाले माई

अंगना से दुअरा आ दुअरा से अंगना ले,
बबुआ का पाछे ही धावेले माई
किलकारीमारत, चुटकीबजावत,
करि के इषाराबोलावेले माई

हलरावे, दुलरावे, पुचकारे प्यार से
बंहियनमें झुला झुलावेले माई
अंगुरीधराई, चले के सिखावत
जिनिगी के ´क-ख´ पढ़ावेले माई

गोदी से ठुमकि-ठुमकि जब भागी त
पकिड़ के तेल लगावेले माई
मउनी बनी अउर “भुंइयालोटाई त
प्यार के थप्पड़ देखावेले माई

पास-पड़ोस से आवे जो ओरहन
कानेकनइठी लगावेले माई
बकी तुरन्त लगाई के छातीसे
बबुआके अमरित पियावेले माई

जरको सा लोरवा ढरकि जाला अंखिया से
देके मिठाई पोल्हावेले माई
चन्दाममा के बोला के, कटोरी में
दूध- भात गुट-गुट खियावेले माई

बबुआ का जाड़ा में ठण्डी ना लागे
तापेले बोरसी, तपावेले माई
गरमी में बबुआके छूटे पसेना त
अंचरा के बेनिया डोलावेले माई

मड़ई में “भुंइया “भींजत देख बबुआ के
अपने “भींजे, नाभिंजावेले माई
कवनो डइनिया के टोना ना लागे
धागा करियवा पेन्हावेले माई

“भेजे में जब कबो देर होला चिट्ठी त
पंडित से पतरा देखावेले माई
रोवेले रात “भर, सूते नाचैन से
भोरे भोरे कउवा उचरावेले माई

जिनिगी के अपना ऊ जिनिगी ना बूझेले
´बबुए नू जिनिगीह´ बोलेले माई
दुख खाली हमरे ऊ सह नाहींपावेले
दुनिया के सब दुख ढो लेले माई

´जिनिगी के दीया´ आ ´ऑंखिन केपुतरी´
´बुढ़ापा केलाठी´ बतावेले माई
´हमरो उमिरिया मिल जाएहमरा बबुआ के´
देवता-पितरके गोहरावेले माई

–मनोज भावुक

Subhikhya
Not from Bihar, heard a lot about the state. Always interested in exploring the art culture and politics of the state. So here I am, writing and doing PR for AaoBihar.com
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