शिक्षित बिहार: छपरा के रितेश सिंह के मोबाइल अप्प पर मुफ्त पढ़ रहे है 50,000 बच्चे

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में डिजिटल साक्षरता के बारे में बात की ताकि सरकार के महत्त्वाकांक्षी ‘डिजिटल इंडिया’ कार्यक्रम के जरिये आर्थिक वृद्धि और सामाजिक विकास की रफ्तार बढ़ाई जा सके क्योंकि फिलहाल तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल काफी कम होता है। देश में सामान्यतौर पर और शिक्षा में विशेषतौर पर तकनीक के इस्तेमाल में तेज प्रगति के लक्ष्य को हासिल करना अहम होगा।

डिजिटल तकनीक के प्रसार, ऊर्जा एवं जीनोमिक्स के क्षेत्र में तरक्की करने से कारोबार और कृषि क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ सकती है और इससे लाखों भारतीयों के शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सेवाओं में सुधार आ सकता है और कारोबार तथा कृषि क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ सकती है।

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बिहार की शैक्षणिक व्यवस्था पर सवाल उठाती मैट्रिक परीक्षा में नकल की तस्वीर विदेशी मीडिया में चर्चित रही। लेकिन इस बार राज्य की प्रतिभा सकारात्मक वजह से कई देशों में चर्चा में है। बिहार के छपरा के रितेश सिंह का बनाया एंड्रॉयड एप ‘इकोवेशन’ देश में स्कूली एजुकेशन का स्वरूप बदल रहा है।
छपरा के रितेश सिंह
रितेश मूल रूप से छपरा के रहने वाले हैं। आईआईटी दिल्ली से बीटेक करने के बाद उन्होंने कई महीने विदेशी फर्म में काम भी किया। अपना और कुछ नया करने की इच्छा ने उन्हें एप बनाने की प्रेरणा दी। एप की बढ़ती मांग को देखते हुए रितेश ने इसके नाम से ही कंपनी बनाई। कॉर्पोरेट अफेयर्स के तहत ‘इकोवेशन’ आज एक रजिस्टर्ड कंपनी है। रितेश इसके सीईओ हैं। उनके दोस्त अक्षत गोयल सीटीओ पद संभाल रहे हैं।
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शिक्षा के लिए मोबाइल आधारित लर्निंग प्लेटफॉर्म की अवधारणा के बारे में सिंह का कहना है कि भारत में मोबाइल के बढ़ते दबदबे के बीच यह अहम हो जाता है कि दूरसंचार का इस्तेमाल शिक्षा देने और परंपरागत शिक्षा व्यवस्था की खामियों को दूर करने के लिए किया जाए। इंटरनेट ऐंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएएमएआई) की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल करीब 22 करोड़ भारतीय मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं और यह तादाद काफी तेजी से बढ़ रही है। ऐसी उम्मीद है कि 2016 तक यह तादाद 23 करोड़ जबकि इससे अगले साल तक यह 31 करोड़ हो जाएगी।
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इकोवेशन के लक्ष्य के बारे में पूछे जाने पर कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) रितेश सिंह का कहना है, ‘हम तकनीक के इस्तेमाल के जरिये साधारण लेकिन प्रभावी तरीके से दो प्रमुख संस्थानों, घरों और स्कूलों को जोडऩे का लक्ष्य रखते हैं।’
शिक्षक-छात्र के बीच की पट रही दूरी :
यह एप अपने जबरदस्त फीचर से शिक्षक व विद्यार्थियों के बीच की दूरी को पाट रहा है। छात्र 24 घंटे इंटरेक्टिव एजुकेशनल सर्विस लेने में भी सक्षम हुए हैं। देश में मुंबई, दिल्ली व कोलकाता के कई बड़े स्कूल भी इस एप का इस्तेमाल कर रहे हैं।
स्कूल से संपर्क बस पलक झपकते
एप “इकोवेशन’ के जरिए छात्र अपने व्यस्त शिक्षकों के साथ इंस्टैंट प्रॉब्लम सॉल्व फीचर से अपनी समस्या का त्वरित समाधान पा रहे हैं। शिक्षक भी विद्यार्थियों को पाठ्य सामाग्री मोबाइल पर बांटने में सक्षम हो रहे हैं। ईमेल और अन्य प्लेटफॉर्म के जरिए यह एप आसानी से शिक्षक व विद्यार्थियों को एक-दूसरे से जोड़ रहा है। रितेश सिंह के एप की अपने देश ही नहीं, पूरी दुिनया में तारीफ हो रही है।
अभिभावक से संपर्क साधना मुश्किल नहीं
एप के जरिए स्कूल प्रशासन भी अभिभावकों से संपर्क में रह सकेंगे। पैरेंट्स-टीचर्स इंटरेक्टिव फीचर के जरिए शिक्षक एक साथ या फिर व्यक्तिगत रूप से अभिभावकों को उनके बच्चों के परफॉर्मेंस व अन्य गतिविधियों की जानकारी दे सकेंगे। अभिभावक भी स्कूल प्रशासन के साथ आसानी से संवाद कर पाएंगे।
कर सकते हैं प्राइवेसी कंट्रोल
एप में अभिभावक, शिक्षक व छात्र प्राइवेसी कंट्रोल भी कर सकते हैं। सभी अलग-अलग एकाउंट से जुड़ सकते हैं। ग्रुप मैसेज के साथ-साथ व्यक्तिगत तौर पर भी संवाद किया जा सकता है। एप के जरिए टेक्स्ट बुक, इमेज, वीडियो, रिमाइंडर, असाइनमेंट आदि शेयर किए जा सकते हैं। एप की खासियत यह है कि इसका साइज कम है और इसे आसानी से मोबाइल पर ऑपरेट किया जा सकता है।
ओपन स्कूल लर्निंग

ओपन स्कूल हम सभी के लिए है तथा हर कक्षा के लिए एक विशेष ग्रुप बना दिया गया है जहा हर विद्यार्थी या अभिभावक जो शिक्षा से जुड़ा है वो उसका लाभ उठा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण ये है की ये निःशुल्क है और देश के सबसे बेहतरीन शिक्षक इसका हिस्सा है।
छोटे शहरों में रह कर हम बड़े शहरों की शिक्षा से कही पीछे छूट जाते है, मगर अब ऐसा नहीं होगा। सब मिल कर पढ़ेंगे और बढ़ेंगे इकोवेशन पर, मात्र 20 सेकंड में आप भी इसका हिस्सा बन जाये। इसके लिए आपको ये करना होगा:

1. डाउनलोड करे:

Eckovation App  डाउनलोड करे: Click
2. मुफ्त अकाउंट बनाये

अपने  मोबाइल नंबर को डाल कर मुफ्त अकाउंट बनाये, अगर parents, students और teachers बना सकते है अकॉउंट। घर में अगर सिर्फ एक ही मोबाइल फ़ोन है  और अधिक students तो इसमें अलग profile बनाने का भी सुविधा है।

3. अपने क्लास का कोड चुने और ज्वाइन करे

निचे दिया गया है हर class का कोड, आप अपनी क्लास का कोड इस्तेमाल करे और ज्वाइन करे ग्रुप, यहाँ से आप ओपन स्कूल का हिस्सा है

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इस खूबसूरत से प्रयास में आप जरूर शामिल हो और अपने शुभचिंतको को ये बातें जरूर बताये। आज जो चाय पे चर्चा हो तो इस पर ही होनी चाहिए।

Source: Business Standard, NDTV and Hindustan

 
 
Subhikhya
Not from Bihar, heard a lot about the state. Always interested in exploring the art culture and politics of the state. So here I am, writing and doing PR for AaoBihar.com
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