बिहार के गवर्नर रहते राम नाथ कोविंद ने शिक्षा के विकास को दिया तवज्जुब

राज्यपाल रामनाथ कोविंद (बीच में) के साथ छह देशों के राजदूत। राजेश कुमार, प्रभात कुमार, मनोज कुमार, संजीव कुमार और तुहीन। (बाएं से)
संयोग देखिए। जिस समय बिहार शिक्षा बोर्ड इस साल के टॉपरों की प्रतिभा को फिर से परख रहा था, उसी वक्त पटना में इसी बोर्ड के छह पुराने टॉपर प्रदेश की तरक्की के रास्ते तलाश रहे थे। बहरीन, कोलंबिया, यूक्रेन, सेनेगल, अर्जेंटीना और नामीबिया में भारत के राजदूत बिहार के रहने वाले हैं।
बिहार के गवर्नर रहते राम नाथ कोविंद ने शिक्षा के विकास को दिया तवज्जुब । अलग अलग राजदूतों से मिल कर चिंतन कर विशेष मॉडल देने का सलाह दिया था।   
 
– बोर्ड और टॉपर की साख पर बट्‌टा लगने से जुड़े सवाल पर डिप्लोमेटिक जवाब दिया।
– बोले- हम बिहार की तरक्की चाहते हैं। मगर, बॉडी लैंग्वेज बता रहे थे कि ये दुखी हैं।
– संयोग : बिहार के रहने वाले और बिहार बोर्ड से ही पासआउट छह आईएफएस प्रदेश के दौरे पर आए हुए हैं।

ये हैं बिहार शिक्षा बोर्ड के पूर्व टॉपर

राज्यपाल रामनाथ कोविंद (बीच में) के साथ छह देशों के राजदूत। राजेश कुमार, प्रभात कुमार, मनोज कुमार, संजीव कुमार और तुहीन। (बाएं से)
राज्यपाल रामनाथ कोविंद (बीच में) के साथ छह देशों के राजदूत। राजेश कुमार, प्रभात कुमार, मनोज कुमार, संजीव कुमार और तुहीन। (बाएं से)
– मनोज कुमार भारती – यूक्रेन में भारत के राजदूत। मधुबनी के बेनीपट्‌टी खेरहा के हैं। स्कूलिंग नेतरहाट से हुई। टॉपर थे। आईआईटी कानपुर से बीटेक किया और फिर आईआईटी दिल्ली से एमटेक।
– प्रभात कुमार – मुजफ्फरपुर के बखड़ा-गोबिंदपुर के हैं कोलंबिया में भारत के राजदूत। सेंट माइकल, पटना से स्कूलिंग। टॉपर रहे हैं।
– संजीव रंजन – अर्जेंटीना में राजदूत। गया के नाजरथ से स्कूलिंग। सेंट माइकल से 12वीं की। डीयू से ग्रेजुएशन। बाद में आइएफएस बने।
– राजीव कुमार – सेनेगल में भारत के राजदूत। सीतामढ़ी के हैं। इनका मन बिहार बसता है।
– आलोक कुमार सिन्हा –बहरीन में भारत के राजदूत, बिहार के ही हैं।
– कुमार तुहीन – नामीबिया में भारत के उच्चायुक्त, बिहार के ही हैं।

नयी शुरुवात बिहार बोर्ड के छात्रों के लिए : पढ़ते चलो, बढ़ते चलो

इस प्रयास में बिहार के लोगों के साथ ही पूरे भारत से समर्थन मिल  है. अपूर्व मिश्रा UPSC की सिविल सर्विसेज परीक्षा पास करने के बावजूद, उसे छोड़ इस मुहिम में शामिल हुए हैं, अक्षत गोयल जापान के करोड़ो रुपये की नौकरी छोड़ आये है और यही कहानी IIT से पढ़े रोहित कुमार तथा DCE की ऋचा का है। मुजफ़्फ़रपुर के निरंजन कुमार ने भी इस तकनीक के विकास में अपना अहम योगदान दिया है.

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Source: Danik Jagran
Sanskriti
A girl from the capital of Bihar, trying to understand the past underdevelopment of Bihar and exploring the ways to improve the status of the State

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