Best Poems of Zakir Khan from Jashn-e-Rekhta | Celebrating Urdu

Jashn e rekhta Zakir Khan

Enjoy the amazing poetry of the famous Comedian Zakir Khan. He visited Jashn-e-Rekhta to watch the show and he became the show there. He read classical poetries of his own and of some famous poets.

Watch the clips and the entire show:

Show: Jashn-E-Rekhta and Zakir Khan

Poetry 1: Usse Acha Nahi Lagta

Usse Acha Nahi Lagta (Lyrics)

जिस  गुलदान  को  तुम  आज   अपना  केहते  हो , उसका फूल  एक  दिन  हमारा  भी  था ,
वो  जो  अब  तुम  उसके  मुक्तार  हो  तो   सून  लो ,
उसे अच्छा  नही लगता ,

मेरी  जान  के  हक़दार  हो  तो  सुन  लो ,
उसे  अच्छा  नहीं  लगता !

वो   जो  अब  तुम  उसके  मुख्तार  हो  तो  सुन  लो ,
उसे  अच्छा नहीं  लगता ,

मेरी  जान  के  हक़दार  हो  तो  सुन  लो ,
उसे  अच्छा  नहीं  लगता ,
की  वो  जो  ज़ुल्फ़  बिखेरे  तो  बिख़िरी  ना  समझना ,
अगर  माथे  पे  आ  जाए  तोह  बेफिक्रि  ना  समझना ,
दरअसल  उसे  ऐसे  ही पसंद  है ,
उसकी  आज़ादी , उसकी  खुली  ज़ुल्फ़ों  में  बंद  है !

जानते  हो ,
जानते  हो  वो  अगर  हज़ार  बार  जुल्फें  ना  सवारे  तोह  उसका   गुज़ारा  नहीं  होता ,
वैसे  दिल  बोहोत  साफ़  है  उसका  इन्  हरकतों  में  कोई  इशारा  नहीं  होता .
खुदा  के  वास्ते , खुदा  के  वास्ते  उसे  कभी  रोक  ना  देना ,
उसकी  आज़ादी  से  उसी  कभी  टोक  ना  देना ,
अब  मैं  नहीं   तुम  उसके  दिलदार  हो  तोह  सुन  लो ,
उसे   अच्छा  नहीं  लगता.!!

Poetry 2: Main Shunya Pe Sawar Hu

Main Shunya Pe Sawar Hu (Lyrics)

मैं शून्य पे सवार हूँ
बेअदब सा मैं खुमार हूँ
अब मुश्किलों से क्या डरूं
मैं खुद कहर हज़ार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ

उंच-नीच से परे
मजाल आँख में भरे
मैं लड़ रहा हूँ रात से
मशाल हाथ में लिए
न सूर्य मेरे साथ है
तो क्या नयी ये बात है
वो शाम होता ढल गया
वो रात से था डर गया
मैं जुगनुओं का यार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ

भावनाएं मर चुकीं
संवेदनाएं खत्म हैं
अब दर्द से क्या डरूं
ज़िन्दगी ही ज़ख्म है
मैं बीच रह की मात हूँ
बेजान-स्याह रात हूँ
मैं काली का श्रृंगार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ

हूँ राम का सा तेज मैं
लंकापति सा ज्ञान हूँ
किस की करूं आराधना
सब से जो मैं महान हूँ
ब्रह्माण्ड का मैं सार हूँ
मैं जल-प्रवाह निहार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ

 

Chirag
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