समाजवाद – गोरख पाण्डेय

समाजवाद – गोरख पाण्डेय

समाजवाद बबुआ, धीरे-धीरे आई समाजवाद उनके धीरे-धीरे आई हाथी से आई, घोड़ा से आई अँगरेजी बाजा बजाई, समाजवाद… नोटवा से आई, बोटवा से आई बिड़ला […]

माई

माई

अबो जे कबो छूटे लोर आंखिन से बबुआ के ढॉंढ़स बंधावेले माई आवे ना ऑंखिन में जब नींद हमरा त सपनो में लोरी सुनावेले माई […]

कहाँ जइब भइया

कहाँ जइब भइया

कहाँ जइबऽ भइया? लगावऽ पार नइया, तूँ मोर दुख देखि ल नेतर से बटोहिया। सुनऽ हो गोसइयाँ, परत बानी पइयाँ, रचि-रचि कहिहऽ बिपतियाँ बटोहिया। छोडि़ […]