डड़ौंकी

डड़ौंकी

उठल डड़ौंकी चलल हौ बुढ़वा दिल में बड़ा मलाल बा । घर में बिटिया सयान हौ, बेटवा बेरोजगार हौ सुरसा सरिस बढ़ल मंहगाई, बेइमान सरकार […]

गरीबी !

गरीबी !

गरीबी ! ना हँसे देले ना रोवे ना जीये देले ना मूए साँप- छुछुंदर के गति क देले पागल मति क देले खोर-खोर के खाले […]

ख्वाहिसों की कतार

ख्वाहिसों की कतार

ख्वाहिसों की कतार, एक जिंदगी और थोड़ी मजबुरीयाँ जिस पल ख्वाहिसों के आँचल में बैठे जाते है, मजबुरीयाँ बिल्खालाते हँसती है जिस पल मजबुरियो के काबू में होते है, […]