गीता प्रेस बंद

Geeta Press

गीता प्रेस बंद हो गया। सुनकर दिल को चोट पहुंची है। गीता प्रेस के बंद होने में एक बड़ा कारण समय के साथ इसके प्रबंधन का नहीं चलना भी है। लोग करोड-करोड़ रुपए चंदा देने पहुंचे, लेकिन इन्हें चंदा मंजूर नहीं था। फिर सभी ने कहा कि लागत से अधिक पुस्तक की कीमत रखें, लेकिन उसे भी ठुकरा दिया गया।
लागत से बहुत कम कीमत पर पुस्तक उपलब्ध कराने को जब मिशन बनाया था तब तो ठीक था, लेकिन समय के साथ इसे लागत मूल्य तक लाते जाते तो यह मिशन जारी रहता। मिशन चलाने के लिए भी पैसे जरूरी होता है। इसका आर्थिक स्रोत कलकत्ता का कपड़ा व्यवसाय था और एक व्यवसाय का पैसा आप दूसरे में कब तक लगाते रहते। इसलिए इसे कभी न कभी बंद तो होना ही था।


वामपंथी अरुंधति राय आदि के नेतृत्व में एक स्डटी पेपर प्रकाशित होने वाला है, जिसमें हिंदुत्व के उभार में गीता प्रेस की भूमिका का अध्ययन है। सचमुच हिंदू धर्म को बचाने में जितना गीता प्रेस ने योगदान दिया, उतना किसी ने नहीं था। हम आज जान ही नहीं पाते कि रामायण-महाभारत-रामचरितमानस-पुराण-उपनिषद आदि क्या है। यह सब हमें गीता प्रेस से ही पता चला। वामपंथी व नेहरूपंथियों ने तो हमें अपने वास्तविक इतिहास से काटने की पूरी कोशिश की, लेकिन गीता प्रेस ने उसे बचाए रखा। किसी समाज को हजारों साल तक जीवित केवल उसका साहित्य रखता है। वेद-उपनिषद-गीता इसका प्रमाण है और गीता प्रेस भी।


प्रबंधन ठीक से नहीं होने के कारण आज गीता प्रेस टूट गया। इसका बहुत बड़ा नुकसान हिंदू धर्म और उसकी आने वाली पीढि़यों को भुगतना पड़ेगा। कोई प्रोफेशनल ग्रुप यदि इसका अधिग्रहण कर ले तो शायद यह फिर से शुरू हो सके |

Source: FB Page of Great Bihar

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