इतिहास बिहार का : Assignment #1

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हम सबका प्यारा बिहार,

हम आपके दर पर आये हैं . कब से फ़रियाद कर रहे हैं लेकिन आप चुप हैं . क्यों? क्या आप हमारी आवाज़ नहीं सुन पा रहे हैं? हम भी तो आपके बच्चे हैं . हम जानते हैं कि पिछली सदियों और सहस्राब्दियों में आपके आँगन में अनेक बच्चों की किलकारियां गूंजी हैं, लेकिन अफशोष कि हम उनके बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानते . हमें तो आपकी जीवनी भी ठीक से नहीं पता . अन्यथा न लें तो हम आपको बताना चाहेंगे कि हम आपके विशेष बच्चे हैं . भई, आखिर हम आपके सामने बैठकर आपसे बात कर रहे ! हम अभी नन्हें-मुन्ने भले हों, लेकिन हम आपके बारे में सबकुछ जानना चाहते हैं. एक बात और . हम आपकी कहानी किसी और के मुंह से नहीं सुनना चाहते; हम नहीं चाहते कि आपके बच्चे आपके बारे में अपुष्ट खबरों का हवाला दें . आपके जीवन में जो कुछ घटा है, वह सब कुछ हम आपके मुंह से ही सुनना चाहते हैं . समझ गए न?

मेरे प्रिय बच्चो,

मैं तुम सबको जानता हूँ . तुम सबसे बेहद प्यार भी करता हूँ . भले तुम जान नहीं पाए हो, लेकिन मैं तुमलोगों की बेहतर परवरिश के लिए हमेशा फिक्रमंद भी रहता हूँ . फिर भी मुझे नहीं लगता कि मैं तुम्हारे लिए ज्यादा कुछ कर पाउँगा . तुमलोगों को मेरे ऊपर इतना निर्भर नहीं करना चाहिए . तुम्ही बताओ, आखिर मैं अकेले कैसे बतापऊँगा कि अबतक मेरे साथ क्या क्या हुआ और क्या क्या हो रहा है ! मुझे नहीं लगता कि मैं तुमलोगों को अपनी यात्रा के बारे में सिलसिलेवार तरीके से सबकुछ बता पाऊँगा . अलबत्ता, मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूँ कि मेरे कुछ बच्चे मेरे बारे में मुझसे बेहतर जानते हैं . वे पूरी दुनिया में फैले हैं . ऐसे में मेरी गुज़ारिश है कि तुमलोग सबकुछ मेरे मुंह से सुनने की जिद्द छोड़ दो . अगर तुमलोग सहमत हो सको तो मैं तुमलोगों को एक वैकल्पिक रास्ता सुझाना चाहूँगा . मैं चाहता हूँ कि तुमलोग मेरी ओर से मेरे सभी बच्चों को आमंत्रित करो और उनसे कहो कि उन्हें मेरी यात्रा और उसके महत्वपूर्ण पडाओं के बारे में जो कुछ भी जानकारी है, उसे वे कागज पर लिखकर सुरक्षित कर लें . फिर इन जानकारियों को एक दूसरे से साझा करके वे मेरे बारे में बेहतर जानकारी हासिल कर सकेंगे .

हमारा सम्मान, हमारा बिहार

इसका मतलब तो ये हुआ कि आप खुद ही अपनी कहानी का मूल्यांकन भी करेंगे . लेकिन हम आपको ऐसा करने नहीं देंगे . आप इस कहानी के महत्वपूर्ण पात्र हैं और इसीलिए यह आपकी ज़िम्मेदारी है कि आप अपने ऊपर लगनेवाले गलत आक्षेपों का जवाब भी दें . आप अपने ही जीवन के बारे में गूंगा-बहरा नहीं बने रह सकते . सबसे बड़ी बात तो ये है कि हमें आपसे ऐसी उम्मीद नहीं थी . आप अपनी भूमिका से मुंह नहीं मोड़ सकते . समझे न !

मेरे प्रिय बच्चो,

मुझे नहीं लगता कि मैंने ऐसा कुछ कहा है तुमसे . मैंने कब कहा कि मैं खुद ही अपनी कहानी का मूल्यांकन भी करूँगा? उल्टे, मैं साफ कर देना चाहता हूँ कि मैं अपने बारे में व्यक्त किये गए किसी भी विचार, किसी भी व्याख्या अथवा निष्कर्ष को लेकर मैं अपनी सहमति या असहमति नहीं जताऊंगा. मैं अपने पसंदीदा रंग-रूप के बारे में भी कुछ नहीं बोलूँगा . इसका मतलब यह नहीं कि मैं तुम्हारी सहायता नहीं करना चाहता . आप निराश न हों, मेरे पास सबका ईलाज है . कहानी शुरू करने के लिए ज़रूरी है कि तुमलोग मेरी कहानी को लेकर आपस में बातचीत करो और उसे ठीक से समझने की कोशिश करो . चलो, सवाल पूछने का अधिकार मैं अपने तईं रखता हूँ . मेरे सवाल पूछने के बाद तुम सब मेरे जीवन के बारे अपने विचार, अपनी व्याख्या और अपने निष्कर्ष साझा करोगे. जब एक सवाल को लेकर बात मुहाने तक पहुँच जाएगी तो मैं दूसरा सवाल ऊचाल दूंगा . और यह चक्र इसी तरह तबतक आगे बढ़ता रहेगा जबतक मैं अपने जीवन में एक नयी सुबह के स्वागत की तैयारी न करने लगूं .

प्रिय बिहार,

हमें आपकी शर्तें मंज़ूर हैं . पूछिए अपना पहला सवाल .

मेरे प्यारे बच्चो,

तो ठीक है . यह रहा मेरा पहला सवाल:

आप मेरे जन्म के बारे में क्या कुछ जानते हैं ?

Chirag
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