#ITeachIndia, बेहतर कल का संकल्प लिए बिहारियों के द्वारा शुरू किए गए प्रयास

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“उस घर अंधेरा छा जाता है, जहां बच्चा स्कूल छोड़ आता है” – रितेश सिंह, संस्थापक, Eckovation

भारत में कुल 23 करोड़ बच्चे स्कूल जाते है जिनमे से 50 प्रतिसत से भी अधिक नवी क्लास तक आते आते विद्यालय छोड़ देते है। शिक्षा वो विश्वास है जो समाज की छोटी इकाई परिवार से समाज की बड़ी इकाई विश्व तक को प्रकाश देता है। इस युग में अधूरे रास्ते शिक्षा का साथ छोड़ना अभिश्राप है। ये अभिश्रपित समाज का होना युही नहीं है, ये पैदा हुआ है हमारे लापरवाही से। बच्चों के विद्यालय छोड़ने का मुख्य कारण है, शिक्षा में गुणवत्ता की कमी, शिक्षक का न होना, माता-पिता का शिक्षा के तरफ झुकाओ। अगर इन कारणों को खत्म न किया जाए तो राज्य नहीं, बल्कि पूरा देश इसका परिणाम झेलेगा या झेल ही रहा है।

लगभग 29 करोड़ लोग भारत में अशिक्षित है जो लगभग विश्व का 37% अकड़ा है।

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60 लाख से भी ज्यादा छात्रों ने कभी स्कूल देखा ही नहीं

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प्रथिमिक विद्यालयों में 34% लड़कियां स्कूल छोड़ देती है

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बिहार के दलित समाज में शिक्षित महिलाओं की संख्या मात्र 38%है जो की आज़ादी के समय भारत के शिक्षित प्रतिसत से भी कम है

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भारत का स्थान शिक्षित महिलाओं में विश्व के 135 देशों में 123वा है

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स्थिति कुछ ऐसी है की हर 9 बच्चों में मात्र 1 बच्चा ही कॉलेज के दरवाजे तक दस्तक दे पता है

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एक बेहतर कल का संकल्प लिए बिहारियों के द्वारा शुरू किए गए प्रयास, इकोवेशन (Eckovation) ने शुरुआत की है #ITeachIndia की। इस कम्पैन में हर बिहारी और हर हिन्दुस्तानी से ये अपील किया जा रहा है की आप जहां भी है, नौकरी में, देश के रक्षा में, घरों में या फिर खेल में, दिन का बस एक घंटा निकल भारत के बच्चों को पढ़ाए और देश बढ़ाए, शामिल हो #ITeachIndia में।
अगर आप दूर कही बैठे हो तो Eckovation जैसे mobile app के जरिये बच्चों को पढ़ा सकते है जैसे स्वेता सिंह जी ने किया है
Eckovation app डावनलोड करे, टीचर की तरह sign-up करें, अपना ग्रूप बनाए और बच्चों को पढ़ाए।
एक शिक्षित समाज ही विकास की सीढ़ी तैयार करेगा।
जय बिहार, जय भारत।

Source: PatnaBeats

 

Sanskriti
A girl from the capital of Bihar, trying to understand the past underdevelopment of Bihar and exploring the ways to improve the status of the State

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