एक गाय का भक्तो के नाम खुला पत्र

A woman worships a cow as Indian Hindus offer prayers to the River Ganges, holy to them during the Ganga Dussehra festival in Allahabad, India, Sunday, June 8, 2014. Allahabad on the confluence of rivers the Ganges and the Yamuna is one of Hinduismís holiest centers. (AP Photo/Rajesh Kumar Singh)

मेरे प्यारे पुत्रों,
मैं आप सब के नाम एक खुला खत लिख रही हूँ। चौंक गए ? चौंकने की कोई जरूरत नहीं है। आज जब मैं राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र-बिंदु बन चुकी हूँ तो सोचा वो वक़्त आन पहुंचा है जब मैं भी अपने मन की बात कर लूँ।

आप सब को तो पता ही है कि मैं घास-भूसा खाती रही हूँ, गोबर करती हूँ, उस गोबर से उपले थापे जाते हैं, उपलों से किसी गरीब का चूल्हा जलता है, उसपे दो वक़्त की रोटी बनती है और उनका पेट भरता है। पर आप सब ये जानकर फूले नहीं समायेंगे कि आजकल मैं भ्रष्टाचार, बलात्कार, सुखाड़, कमरतोड़ महंगाई, रुपये में गिरावट, किसानों की आत्महत्या जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे खाती हूँ। और तो और गोबर करने के लिए मैंने कुछ बुद्धि के विंध्याचल चिन्हित कर रखे हैं। वे अपने श्रीमुख से लगभग नित्य प्रति नियम से गोबर करते हैं और फिर उस गोबर को लोगों के दिमाग में ठूंसा जाता है। उससे राजनीतिक कुनबे का चूल्हा जलता है, उसपे राजनीतिक रोटियां सेंकी जाती हैं और उससे उनका वोट वाला बैंक भरता है। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि मेरी पूँछ में इतनी शक्ति है कि कोई पार्टी अथवा नेता उसे पकड़ ले तो मैं उसकी चुनावी वैतरणी भी पार लगाने का माद्दा रखती हूँ। गौमूत्र तो अब इतना पवित्र हो गया है कि फिनाइल की जगह इसे छिड़का जा रहा है। वो दिन दूर नहीं जब गंगा में भी चंद बूँद गौमूत्र डालने से ही इसकी सफाई हो जायेगी। स्विस बैंकों में पड़े काला धन पर गौमूत्र छिड़क देने से ही ये सफेद हो जाएगा और काला धन धारकों को दो घूँट गौमूत्र पिला देने से उनका हृदय-परिवर्तन हो जाएगा। वो घड़ी लगभग आ ही गयी है जब नासा वाले मंगल समेत तमाम ग्रहों पर पानी और जीवन की जगह गौ और गौमूत्र तलाशना आरंभ करेंगे।


बहरहाल आप सब तो जानते ही हैं कि अबतक मुझसे गोवंश चलता था पर अब मुझसे एक गप्परंपरा प्रारंभ हुई है। अब चैनेल -चैनल बैठे चर्चा-चक्रवर्ती प्राइम प्रहर में बड़े ही भैरव स्वर में गऊ-गीत गाते पाये जाते हैं। मसलन पहले मैं दुधारू हुआ करती थी, आजकल टीआरपीऊ हो गयी हूँ। सरल शब्दों में कहूँ तो दुहने वाले मेरा दूध दुहते आये थे, आजकल टीआरपी दुहते देखे जा रहे हैं।


ये लिखते हुए मुझे अत्यंत हर्ष हो रहा है कि मुज्जफरनगर महामहोत्सव में शरीक संगीतकार साहब मीट प्रोसेसिंग कंपनी के डायरेक्टर होते हुए भी गोरक्षा आंदोलन की सबसे मुखर आवाज हैं। आखिर बंदा जिसकी कमाई खाता है उसके गुण गाता तो है ! ये बात जानकर मेरा तो इंसानियत पे भरोसा ही दुगुना हो गया। ये मेरे लिए गौरव का विषय ही है कि विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के लोग अब रामलला को रिमेम्बर करने की बजाय गौमाता का गरिमा-गायन कर रहे हैं।


मेरे लिए इससे ज्यादा संतोष की बात क्या हो सकती है कि मेरे मातृभक्त सपूत गौ-हत्या की अफवाह तक पर इंसान की जान लेने को उतारू हों। मुझे फक्र है कि कलतक लोग मेरे नाम पर सिर्फ चारा खाते आये थे, किन्तु अब मेरे नाम पे भाईचारा भी खा रहे हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो मेरे अच्छे दिन चल रहे हैं। यूपी से यूएन तक हर ओर बस मेरे नाम का ही शोर है।


आपको बताऊँ कि समय के साथ हमारी बिरादरी भी मॉडर्न हो गयी है। भरोसा न हो तो जरा नज़रें घुमाकर देखो कि कैसे गौशालों से उठकर ट्रैफिक सिग्नलों और चारागाहों से ऊबकर म्युनिसिपेलिटी के कचरा घरों के पास अब यह चौपाया जानवर पाया जाता है। इसलिए वक़्त आ गया है कि आपलोग मेरी चिंता करने की बजाय रोजगार के अन्य अवसर तलाशें। मेरी आप सब से प्रार्थना है कि वैदिक काल के मकड़जाल में फंसकर धर्मधुरंधर शाकाल न बनें। जब मैं अपने गोबर से परमाणु बम तक को बेअसर करने की क्षमता रखती हूँ तो फिर मेरी रक्षा के लिए आपलोग क्यों अपनी सींग घुसेड़ते रहते हो ? अरे जब मंगोल,अफगान, तुर्क, तातार, तुग़लक़, ग़ुलाम, लोदी, मुग़ल,अंग्रेज़ इत्यादि का सदियों लंबा अत्याचार मेरा वजूद नहीं मिटा पाया तो ये सिकुलर सरकार पिंक रेवोल्यूशन को पीक पर पहुंचाकर या बीफ खाने वाले को मंत्री बनाकर मेरी बिरादरी का क्या बिगाड़ लेगी ? मैं आपसब को भरोसा दिलाना चाहती हूँ कि उन मुट्ठी भर चिरकुटों की बीफ पार्टी वगैरह करने से मेरा नामोनिशान नहीं मिटने वाला। आपलोग निश्चिन्त रहें, मेरे अस्तित्व पे कोई खतरा नहीं मंडरा रहा है। अतः मेरी रक्षा के लिए फोटोशॉप-विद्या तथा अफवाह-उद्योग का उपयोग न करने की कृपा करें। ऐसा नहीं है कि आपसब ये करते हैं तो मुझे अच्छा नहीं लगता है। बस आपकी परवाह करती हूँ। आखिर माँ हूँ न। ये नाशपीटे निकम्मे ठुल्ले खामखा मेरे प्राणों से प्रिय बेटे-बेटियों पर फर्जी एफआईआर ठोक देते हैं। फिर फ़ालतू का गोइंग टू जेल एंड चक्की पीसिंग एंड पीसिंग एंड ऑल ! आपकी इतनी ही श्रद्धा है तो #SelfieWithDaughter की तर्ज पर#SelfieWithMotherCow जैसे पॉजिटिव कैंपेन चलायें। वो क्या है न मुझे भी नेगेटिविटी से थोड़ी एलर्जी सी हो गयी है। वैसे भी जब इस तरह के अभियान से बेटी बचायी जा सकती है तो मैं क्यों नहीं ?


इसलिए आपसे गुज़ारिश है कि अब से हर इतवार अपनी-अपनी गाय माता के साथ सेल्फी खींचिए और बेझिझक फेसबुक पर डालिये या ट्विटर पर ट्वीटीए। घर में गाय की जगह कुत्ता पालते हों तो फोटोशॉप विद्या इस्तेमाल में लाएं और उसी को गाय बनायें। बाकी मैंने तो मेरी तरह “मैं-मैं” करने वाला ब्रांड एम्बेस्डर बना ही रखा है।

From: Facebook Post of Mr. Human

Comments

comments