एक सस्ती दवाई रोक सकती है कोरोना को आपके शरीर में फैलने से, जाने पूरी जानकारी

Medicine of Coronavirus

। इस बीच बड़ी खबर कोरोना पॉजिटिव मरीज की मौत के मामले में लापरवाही (Negligence) की है। मृतक बिहार के मुंगेर का रहने वाला था। कदम-कदम पर लापरवाही के कारण बीमार होने से मौत एवं अंतिम संस्‍कार तक वह ‘कोराना बम’ (Corona Bomb) बनकर समाज में रहा। इस दौरान वह कितने लोगों के संपर्क में आया, और उनमें से कितने की जांच हुई, यह बड़ा सवाल है।

Coronavirus

एम्स पटना के निदेशक डॉ. प्रभात कुमार सिंह ने बताया कि मरीज किडनी रोग से ग्रसित था और उसकी मौत के बाद विलंब से रिपोर्ट आई। कदम-कदम पर व्‍यवस्‍था में इसी विलंब या लापरवाही के कारण युवक संक्रमण से लेकर मौत के बाद तक ‘कोरोना बम’ बना रहा। कोरोना संक्रमित युवक विदेश से आने के बावजूद स्‍वास्‍थ्‍य जांच से कैसे बचा, यह सवाल है। अगर उसकी स्‍वास्‍थ्‍य जांच हुई जो यह कैसी जांच थी, कि संक्रमण का संदेह तक नहीं हुआ? विदेश से आने व कोरोना संक्रमण के लक्षणों के बावजूद मुंगेर से लेकर पटना तक इलाज के दौरान किसी भी डॉक्‍टर ने समय रहते कोरोना की जांच क्‍यों नहीं करायी?

सबसे बड़ा सवाल: कोई दवाई है क्या जो कोरोना को रोक सकती है

इसका जबाब हाँ है, कोरोना को आपके शरीर में रोकने के लिए एक दवाई है जिसे डॉक्टरों ने देना शुरू कर दिया है। ध्यान रहे इस दवाई से कोरोना मरता नहीं है मगर बढ़ना रुक जाता है जिससे इंसान के मृत्यु का भय खत्म हो जाता है। ये दवाई है कोलोरोक्विने (Chloroquine)। शोधकर्ताओं ने 70% रोगियों में वायरल क्लीयरेंस को देखा, जो कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के साथ इलाज करते थे, लेकिन नियंत्रण समूह के केवल 13% में, जिन्हें एक प्लेसबो प्राप्त हुआ था। हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन समूह में छह रोगियों को सुपरडेड संक्रमण के लिए एज़िथ्रोमाइसिन भी दिया गया था; सभी छह मरीज छह दिनों के बाद वायरस से मुक्त थे।

Chloroquine

Chloroquine, or hydroxychloroquine, 1944 से मलेरिया के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। यह संक्रमण को रोकने के लिए मलेरिया के संपर्क में आने से पहले दिया जा सकता है, और इसे बाद में उपचार के रूप में भी दिया जा सकता है। हाइड्रोक्सी-क्लोरोक्विन प्रयोगशाला अध्ययनों और इन अध्ययनों में कोरोनावायरस के खिलाफ प्रभावी पाया जाता है। प्रोफिलैक्सिस में इसका उपयोग उपचार के रूप में लाभ के उपलब्ध साक्ष्य से प्राप्त होता है और प्रीक्लिनिकल डेटा द्वारा समर्थित है,” सलाहकार ने कहा।

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इस दौरान हमें प्रत्येक को इस महामारी के प्रसार को रोकने के लिए, जब सामाजिक उपयुक्तता, आत्म-संगति और आत्म-अलगाव में संलग्न होकर अपना हिस्सा करना चाहिए।

कोरोना का खौफ: मरीजों की भीड़ रोकने को बिहार में सभी सरकारी अस्पतालों में ओपीडी बंद

राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों की ओपीडी सेवा बंद कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों के ओपीडी (बाह्य चिकित्सा कक्ष) में सामान्य मरीजो को भीड़ को रोकने के लिए ओपीडी सेवा को बंद करने का निर्देश दिया है।

राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने बताया कि ओपीडी में मरीजों की भीड़ से इन्फेक्शन के बढ़ने का खतरा है। इसलिए सामान्य मरीज अपने घर से चिकित्सकीय परामर्श डॉक्टर से प्राप्त कर सकेंगे।

कोरोना वायरस के लक्षण

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कोरोना वायरस बेहद आम होते हैं. इसके शुरुआती लक्षणों से अंदाजा लगाया जा सकता है, सांस लेने में थोड़ी तकलीफ़, खांसी या फिर बहती हुई नाक. लेकिन कोरोना परिवार के कुछ वायरस बेहद ख़तरनाक़ होते हैं जैसे सार्स (सिवियर एक्यूट रेसपिरेटरी सिंड्रोम) और मर्स (मिडल ईस्ट रेसपिरेटरी सिंड्रोम).

वुहान से शुरू हुई इस महामारी के लिए जिम्मेदार विषाणु को नॉवेल कोरोना वायरस या nCoV का नाम दिया गया है. मालूम पड़ता है कि ये कोरोना परिवार की एक नई नस्ल है जिसकी पहचान अभी तक इंसानों में नहीं हो पाई थी.

कोरोना वायरस से संक्रमण के मामलों में ऐसा लगता है कि इसकी शुरुआत बुखार से होती है और फिर उसके बाद सूखी खांसी का हमला होता है. हफ़्ते भर तक ऐसी ही स्थिति रही तो सांस की तकलीफ़ शुरू हो जाती है.

लेकिन गंभीर मामलों में ये संक्रमण निमोनिया या सार्स बन जाता है, किडनी फेल होने की स्थिति बन जाती है और मरीज़ की मौत तक हो सकती है. कोरोना के ज़्यादातर मरीज़ उम्रदराज़ लोग हैं, ख़ासकर वो जो पहले से ही पार्किंसन या डायबिटिज़ जैसी बीमारियों से जूझ रहे हों.

लंदन स्कूल ऑफ़ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसीन के डायरेक्टर प्रोफ़ेसर पीटर पियोट कहते हैं, “अच्छी ख़बर ये है कि कोरोना सार्स विषाणु की तुलना में कम जानलेवा है. अतीत की तुलना में वैश्विक स्तर पर सूचना का ज़्यादा और बेहतर आदान-प्रदान हो रहा है. ये अहम है क्योंकि एक संभावित महामारी से कोई देश अकेले नहीं लड़ सकता है.”

इस संक्रमण से निजात पाने के लिए फिलहाल कोई ख़ास इलाज नहीं है. डॉक्टर संक्रमित मरीज़ों का इलाज फिलहाल उनके लक्षण के आधार पर ही कर रहे हैं.

 

कोरोना वायरस से बचने के लिए क्या कर सकते हैं?

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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने प्रभावित इलाके लोगों को पहले से निर्धारित सामान्य एहतियाती उपाय बरतने की सलाह दी है ताकि संक्रमण के ख़तरे को कम किया जा सके. इन उपायों में हाथ साफ़ रखना, मास्क पहनना और खान-पान की सलाह शामिल है.

सांसों की किसी तकलीफ़ से संक्रमित मरीज़ों के क़रीब जाने से लोगों को बचने की सलाह दी गई है. नियमित रूप से हाथ साफ़ करते रहें, ख़ासकर किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के फौरन बाद, पालतू या जंगली जानवरों से दूर रहने की सलाह भी दी गई है. कच्चा या अधपका मांस खाने से मना भी किया गया है.

कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों को छींक आने की सूरत में सामने खड़े लोगों को बचाने की सलाह दी गई है. जैसे नाक पर कपड़ा या टिशू रखना, सामने खड़े व्यक्ति से फासला बनाकर रखना, नियमित रूप से साफ़ सफ़ाई जैसे एहतियात बरतने की उम्मीद की जाती है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन को ऐसे साक्ष्य मिले हैं जिनमें क़रीब के लोगों के संक्रमित होने के मामलों की पुष्टि हुई है. इसकी वजह ये भी है कि परिवार में एक व्यक्ति के संक्रमित होने की सूरत में दूसरा उसकी देखभाल करने लगता है. हालांकि अभी तक इसके बाहर होने वाले संक्रमण को लेकर कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं.

 

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