नागपंचमी: नागों की पूजा से संबंधित कई कथाएं

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नागपंचमी के दिन नागों की पूजा की जाती है। मगर यह पूजा क्यों की जाती है? दरअसल नागों की पूजा से संबंधित कई कथाएं अलग-अलग क्षेत्रों में सुनी-सुनाई जाती है। इन कथाओं में नागपंचमी पूजन का महत्व एवं इसकी शुरूआत कैसे हुई यह बताया गया है।

पहली कथाः दूध की कटोरी से नागिन हुई प्रसन्न

नागपंचमी की कई कथाओं में एक कथा आंध्रप्रदेश में काफी लोकप्रिय है। किसी समय एक किसान अपने दो पुत्रों और एक पुत्री के साथ रहता था। एक दिन खेतों में हल चलाते समय किसान के हल के नीचे आने से नाग के तीन बच्चे मर गए। नाग के मर जाने पर नागिन ने रोना शुरू कर दिया और उसने अपने बच्चों के हत्यारे से बदला लेने का प्रण किया।

रात में नागिन ने किसान व उसकी पत्नी सहित उसके दोनों लड़कों को डस लिया। अगले दिन प्रात: किसान की पुत्री को डसने के लिये नागिन फिर चली तो किसान की कन्या ने उसके सामने दूध से भरा कटोरा रख दिया। और नागिन से हाथ जोड़कर क्षमा मांगने लगी। नागिन ने प्रसन्न होकर उसके माता-पिता व दोनों भाइयों को पुन: जीवित कर दिया।

कहते हैं कि उस दिन श्रावण मास की पंचमी तिथि थी। उस दिन से नागों के कोप से बचने के लिये नागों की पूजा की जाती है और नाग -पंचमी का पर्व मनाया जाता है।

दूसरी कथाः नाग भाई ने दिए बहन को उपहार

एक धनवान सेठ के छोटे बेटे की पत्नी रूपवान होने के साथ ही बहुत बुद्धिमान भी थी। उसका कोई भाई नहीं था। एक दिन सेठ की बहुएं घर लीपने के लिए जंगल से मिट्टी खोद रही थीं तभी वहां एक नाग निकला। बड़ी बहू उसे खुरपी से मारने लगी तो छोटी बहू ने कहा ‘सांप को मत मारो’। यह सुनकर बड़ी बहू ने रुक गई।

जाते-जाते छोटी बहू सांप से थोड़ी देर में लौटने का वादा कर गई। मगर बाद में वह घर के कामकाज में फंसकर वहां जाना भूल गई। दूसरे दिन जब उसे अपना वादा याद आया तो वह दौड़कर वहां पहुंची जहां सांप बैठा था और कहा, ‘सांप भैया प्रणाम!’ सांप ने कहा कि आज से मैं तेरा भाई हुआ, तुम्हें जो कुछ चाहिए मुझसे मांग लो। छोटी बहू ने कहा, ‘तुम मेरे भाई बन गये यही मेरे लिए बहुत बड़ा उपहार है।’

कुछ समय बाद सांप मनुष्य रूप में छोटी बहू के घर आया और कहा कि मैं दूर के रिश्ते का भाई हूं और इसे मायके ले जाना चाहता हूं। ससुराल वालों ने उसे जाने दिया। विदाई में सांप भाई ने अपनी बहन को बहुत गहने और धन दिये। इन उपहारों की चर्चा राजा तक पहुंच गयी। रानी को छोटी बहू का हार बहुत पसंद आया और उसने वह हार रख लिया।

रानी ने जैसे ही हार पहना वह सांप में बदल गया। राजा को बहुत क्रोध आया मगर छोटी बहू ने राजा को समझाया कि अगर कोई दूसरा यह हार पहनेगा तो यह सांप बन जाएगा। तब राजा ने उसे क्षमा कर दिया और साथ में धन देकर विदा किया। जिस दिन छोटी बहू ने सांप की जान बचायी थी उस दिन सावन कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि थी इसलिए उस दिन से नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है।

तीसरी कथाः नाग की पूजा से मिला संतान सुख

नाग पंचमी से संबंधित एक अन्य कथा के अनुसार एक राजा के सात पुत्र थे। सभी का विवाह हो चुका था। उनमें से छ: पुत्रों के यहां संतान का जन्म हो चुका था। राजा के सातवें पुत्र के घर संतान का जन्म नहीं हुआ था। संतानहीन होने के कारण उन दोनों को घर और समाज में तानों का सामना करना पड़ता था।

समाज की बातों से उसकी पत्नी परेशान हो चुकी थी। परन्तु पति यही कहकर समझाता था, कि संतान होना या न होना तो ईश्वर के हाथ है। इसी प्रकार उनकी जिन्दगी संतान की प्रतीक्षा में गुजर रहे थे। एक दिन श्रवण मास की पंचमी तिथि के दिन रात में राजा की छोटी बहू ने सपने में पांच सांप देखे।

उनमें से एक सांप ने कहा कि, पुत्री तुम संतान के लिए क्यों दुःखी होती हो, हमारी पूजा करो तुम्हारे घर संतान का जन्म होगा। प्रात: उसने यह स्वप्न अपने पति को सुनाया, पति ने कहा कि जैसे स्वप्न में देखा है, उसी के अनुसार नागों का पूजन करो। उसने उस दिन व्रत कर नागों का पूजन किया, और कुछ समय बाद उनके घर में संतान का जन्म हुआ।

Sanskriti
A girl from the capital of Bihar, trying to understand the past underdevelopment of Bihar and exploring the ways to improve the status of the State

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