अँधेरी जिंदगी को रौशन करता बिहार के पंकज परमार का प्रयास, प्रकाश उजाला जिंदगी का

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बिहार के गोपालगंज जिला के गांव उदंत राय का बंगरा के रहने वाले ‘‘ पंकज परमार ’’ बचपन से ही समाज के लिए कुछ करने का जज्बा था।
इसी जज्बे के कारण ही 2010 में प्रकाश उजाला जिंदगी (NGO) कीं नीव दिल्ली जैसे बड़े षहर मे रखी गयी।

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50 बच्चो से सफर शुरू हुआ और कब 500 तक जा पहुँचा पता ही नही चला आरंभ मे 50 एसे बच्चो को चुना गया जो आगे पढ कर कुछ करना चाहते हैं।

इन 50 बच्चो को पोलिटेक्निक की तैयारी करवाई गई। 50 मे से 40 बच्चे पोलिटेक्निक मे सफल होकर कीर्तिमान रच दिया।

पंकज परमार का मानना है कि सभी बच्चे मेडिकल या IIT मे नही जा सकते है। इसका मुख्य कारण महँगी कोचिगं और सीट का कम होना।

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आज सफलता का आलम यह है कि प्रकाश उजाला जिंदगी (NGO) , स्वास्थ्य, एवम् महिला सषक्तिकरण सहित तीन क्षेत्रो मे काम कर रही है। स्वास्थ्य के क्षेत्र मे विषेश रूप से मानसिक, स्वास्थ्य के क्षेत्र मे अपनी अनुसंगी संस्था Psychology power  के साथ कार्य कर रही है ‘‘ पंकज परमार ’’ का सपना है कि अपने गोपलगंज मे भी शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सषक्तिकरण के इसी माॅडल का विस्तार करना ।

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Sanskriti
A girl from the capital of Bihar, trying to understand the past underdevelopment of Bihar and exploring the ways to improve the status of the State

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