ख्वाहिसों की कतार

ख्वाहिसों की कतार, एक जिंदगी और थोड़ी मजबुरीयाँ जिस पल ख्वाहिसों के आँचल में बैठे जाते है, मजबुरीयाँ बिल्खालाते हँसती है जिस पल मजबुरियो के काबू में [...]

किनारे

कुछ काम-बेसी ही सही उतार-चढ़ाओ के साथ दूंढ़ ही लेते है हम फसे मझदार में कयी  ख्त्म होती साल के साथ निकले है [...]