मैं पटना बोल रहा हूँ

Guru Gobind Singh Ji

मैं आज गुरु के चरणों के समीप बैठा हूँ ।“नाम खुमारी नानका चढ़ी रहे दिन रात “। गुरु के चरणों की सेवा, हाँ दसवें गुरु गोविन्द सिंह जी के चरणों की सेवा । जिनके तेज़ और बल के सामने मुगलों की तलवारें कुंद पड़ गयी थी ।
क्या भगवान बुद्ध और क्या भगवान महावीर सभी ने अपना मुझे ज्ञान स्थली बनाया और अपने ज्ञान को समाज में बाँटा। पर वक़्त के थपेड़ों के बीच आज यहाँ सिर्फ गुरु का झंडा यहाँ बुलंद है । सिखों के दसवें और अंतिम गुरु यानि गुरु गोविन्द सिंह का जन्म यहीं 22 दिसंबर सन 1666 में हुआ था। हर मंदिर साहिब उन्हीं की याद में बनाया गया है जहाँ उनके स्मृति चिन्ह हैं। सिखों के पांच तख्तों में से दरबार साहिब अमृतसर के बाद पटना साहिब का दूसरा स्थान है।


कभी ये इलाका “कूचा फरूख खान ” के नाम से जाना जाता था पर अब इसे हरमंदिर गली के रूप में जाना जाता है। अब आप अगर यह सोच रहे हैं कि गुरू गोविंद सिंह का जन्म पंजाब में ना होकर मेरी सर ज़मीं में कैसे हुआ तो इसके पीछे भी एक इतिहास है। सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर साहिब की ननिहाल बिहार में थी और गुरु गोविन्द सिंह का जन्म अपने पिता के ननिहाल में ही हुआ था। हरमंदिर साहिब में आपको सुनहरे रंग का ऐतिहासिक चोला साहिब देखने को मिलेगा जिसे देख कर आपको बहुत सुखद अनुभूति होगी। यह वही ऐतिहासिक चोला है जिसे गुरु गोविंद साहिब ने 15 साल की उम्र में धारण कर लिया था। गुरु गोविंद सिंह के जन्मस्थान पर आपको उन से जुड़ी कई धरोहर देखने को मिल जाएंगी जिसे गुरु गोविंद सिंह अपने जीवन काल में इस्तेमाल करते थे। यहां आप वो पंगुरा (पालना) देख पाएंगे जिसमें सोने की परत चढ़ी हुई है। जो गुरु जी के बचपन में उनको सुलाने के लिए इस्तेमाल होता था। इसके अलावा उनकी खड़ाऊ, तीर और तलवार भी इसी कमरे में रखे गए हैं। गुरु गोविंद सिंह और गुरु तेग बहादुर सिंह द्वारा जारी किया गया हुक्मनामा की किताब भी इसी पवित्र गुरुद्वारे में रखी गई है। गुरु गोविंद सिंह द्वारा उपयोग में लाई गई चीज़े देख कर आप खुद को बहुत ही भाग्यशाली पाएंगे।


गुरु के चरणों और हरमंदिर साहिब के तख़्त से मैं आज भी बोल रहा हूँ —
मन में सिंचो हर हर नाम, अंदर कीर्तन, होर गुन गाम, ऐसी प्रीत करो मन मेरे आठ पहर प्रब जानो नेहरे!
मैं पटना बोल रहा हूँ !

gurudwaras-8a

Sanskriti
A girl from the capital of Bihar, trying to understand the past underdevelopment of Bihar and exploring the ways to improve the status of the State

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