A Poet at Play

A Poet at Play

वे डरते हैं, किस चीज़ से डरते हैं वे तमाम धन-दौलत, गोला-बारूद पुलिस-फ़ौज के बावजूद ? वे डरते हैं, कि एक दिन निहत्थे और ग़रीब लोग, उनसे डरना बंद […]

समाजवाद – गोरख पाण्डेय

समाजवाद – गोरख पाण्डेय

समाजवाद बबुआ, धीरे-धीरे आई समाजवाद उनके धीरे-धीरे आई हाथी से आई, घोड़ा से आई अँगरेजी बाजा बजाई, समाजवाद… नोटवा से आई, बोटवा से आई बिड़ला […]