UPSC में फिर बिहार ने मारी बाजी दो छात्र टॉप 10 में

UPSC-2015-Bihar-Result

गया के कर्ण सत्यार्थी ने यूपीएससी का चक्रव्यूह भेदकर देशभर में नौंवा स्थान हासिल किया है। बचपन से ही कर्ण का रुझान सिविल सर्विसेस की ओर रहा था। धनबाद के डिनोबली स्कूल डिगवाडीह से प्लस टू कर आईआईटी में प्रवेश पाया।

आईआईटी खड़गपुर से पढ़ाई पूरी करने के बाद कर्ण ने सिविल सर्विसेस की तैयारी शुरू कर दी। कर्ण ने दूसरे प्रयास में अपनी मंजिल हासिल की। पहले प्रयास में वह इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। इसके बाद उससे और अधिक आत्मविश्वास के साथ तैयारी शुरू कर दी। आईआईटी का छात्र होने के बावजूद मुख्य परीक्षा में कर्ण ने राजनीति विज्ञान को चुना।

कर्ण के पिता प्रफुल्ल कुमार शर्मा बीआईटी सिंदरी में सिविल इंजीनियर के प्रोफेसर हैं। प्रो शर्मा ने बताया कि कर्ण बचपन से ही कहता था कि सिविल सर्विस में जाना है। इसके लिए मैं और मेरी पत्नी तुनजा शर्मा ने हर पल उसकी हौसलाआफजाई की। कर्ण की बहन आकांक्षा ने भी मणिपाल से मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर ली है। कर्ण ने झारखंड और बिहार का ऑप्शन दिया था। लेकिन कर्ण की इच्छा बिहार में काम करने की है।

संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में बिहार के जहानाबाद जिले के काको प्रखंड क्षेत्र के एक छोटे से गांव देवघरा के रवि प्रकाश ने बाजी मारी।

उनके पिता मृणाल कुमार शर्मा हाजीपुर में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में उपप्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं। मां रूबी शर्मा उच्च शिक्षा प्राप्त कुशल गृहणी हैं।

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संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 54वां रैंक लाकर उक्त छात्र ने अपने परिवार के साथ-साथ अपने जिले और राज्य का नाम भी रौशन किया। उनके पिता श्री शर्मा ने बताया कि रवि ने शुरू से ही पटना के लोयला स्कूल से मैट्रिक तक की पढ़ाई की। प्लस टू की पढ़ाई उसने राजस्थान के कोटा में की। वर्ष 2011 में आईआईटी कानपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी में जुट गया।

रवि प्रकाश ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां को दिया। दो भाईयों में रवि बड़े हैं। उनसे छोटा भाई राजस्थान के कोटा में रहकर मेडिकल की तैयारी कर रहा है। रवि ने पहले डॉयमंड कंस्लटेंसी में 18 लाख के सालाना पैकेज पर बतौर इंजीनियर काम किया। लेकिन उन्होने जल्द ही उस नौकरी को ठुकरा दी। दिल्ली के पटेलनगर स्थित एक किराए के मकान में रहकर उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी की।

उन्होने तीसरी बार में यह सफलता अर्जित की। दो बार वे इंटरव्यू से छंटकर वापस हो गए। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और तीसरे प्रयास में अपनी मंजिल को पा लिया। उनके माता-पिता पटना के एजी कॉलोनी स्थित अपने निजी मकान में रहते हैं। सफलता पाने वाले उक्त छात्र ने भी अपनी मैट्रिक तक की पढ़ाई अपने माता-पिता के साथ ही रहकर पूरी की।

उनके पिता श्री शर्मा कहते है कि रवि स्वभाव और विचार से सादे प्रकृति के हैं। वे गांव के वंचित लोगों के लिए कुछ खास करने की तमन्ना रखते हैं। रवि का मानना है कि निरंतर प्रयास और आत्मविश्वास के साथ मंजिल पाई जा सकती है। दस से बारह घंटे की नियमित पढ़ाई कर उक्त परीक्षा में सफलता पाई। यूपीएससी की परीक्षा में उनका ऐच्छिक विषय राजनीति शास्त्र रहा।

 

Sanskriti
A girl from the capital of Bihar, trying to understand the past underdevelopment of Bihar and exploring the ways to improve the status of the State

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